देवास का मल्हार स्मृति मन्दिर अनगिनत कलाकारों की प्रस्तुति का साक्षी रहा है। संगीत, वाद्य यंत्र, बैंड, नृत्य से लेकर तमाम कलाएँ यहाँ आकर धन्य हुईं और यहाँ के दर्शकों और श्रोताओं को तृप्ति दी।
यहीं छोटे से मंच पर संगतकारों के संग बिरजू महाराज को लगभग दो ढाई घण्टे थिरकते देखा है मैंने। शायद तीन बार से ज़्यादा और हर बार उनकी ऊर्जा चकित करती थी। उन्हें 1970 से देख रहा था। देवास, इन्दौर, भोपाल, मुम्बई, दिल्ली। वो आदमी थकता ही नहीं था। गाढ़ी लाली लगे होठों पर गज़ब की मुस्कान हमेशा चिपकी रहती थी।
आज के बुलेटिन में ख़ास :
Focus on your team as well and not just the opposition, always trying to catch people.
मैंने यह सुना तो इसके बैकग्राउंड में एक और आवाज़ सुनाई दी
Whole country playing against 11 boys...
केपटाउन टेस्ट का लाइव प्रसारण देखते हुए जब मैंने यह दूसरा बयान सुना तो आवाज़ पहचान गया। और मुस्कुराकर रह गया। लेकिन फिर रीप्ले में देखा कि विराट कोहली स्टंप की ओर गए और झुककर पूरे होशो-हवास में कहा,
आसमान खाली है, एक सिर्फ़ सूरज चमक रहा है। सुबह से सन्देश आ रहे हैं कि आज छह ग्रह एक पंक्ति में रहेंगे और यह समय 500 वर्षों बाद आया है। अर्थात फिर आएगा। हो सकता है तब हम सब ग्रह नक्षत्रों के साथ एक पंक्ति में साथ खड़े हो जाएँ। फिर सब कुछ ख़त्म भी हो जाए। मैं कल्पना करता हूँ कि किसी अज्ञात जगह और किसी व्योम में सब टँगे हैं और चर- अचर में भेद मिट गया है।
आज के बुलेटिन में जानिए :
कमाल खान नहीं रहे... सुबह से इस ख़बर पर यकीन मुश्किल हो रहा है। अब भी जब ये टिप्पणी टाइप कर रहा हूँ तो समझ नहीं आ रहा है कि क्या और कैसे लिखा जाएगा। उनसे कभी मिला नहीं था। बस, उनकी रिपोर्ट देखीं थीं, यूट्यूब पर ढूँढ़कर देखा-सुना था। कोशिश रहती थी कि जब भी मौका मिले तो उन्हें देखा और सुना जाए...
आज के बुलेटिन में जानिएः
तस्वीर राजस्ठान के जैसलमेर की है। राजस्थान डायरेक्ट से साभार।
बड़ा रोचक-सोचक है, इनका जमावड़ा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक जगह है, शाहपुरा। वहीं के आसपास के यही कोई 65 से 85 साल के करीब 14-15 ‘युवा’, जी हाँ युवा ही, मंडली के किसी एक सदस्य के घर पर हर महीने जुटते हैं। कोशिश होती है, महीने की शुरुआत में ही यह जुटान हो जाए। इस दौरान गप्पें होती हैं। ठहाके गूँजते हैं। शेरो-शायरी, कविताओं के दौर चलते है। दिल की बात और जज़्बात भी साझा करते हैं। फिर दावत होती है। और इस दावत में जलेबी ज़रूर होती है।
आज के बुलेटिन में सुनिएः
यूनियन कार्बाइड फैक्टरी की सुरक्षा पर सरकार को हर महीने करीब दो लाख रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं।… विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के साथ ही होमगार्ड के जवान भी फैक्टरी परिसर में तैनात हैं। फैक्टरी की जमीन और परिसर में स्थित संपत्ति फिलहाल जिला प्रशासन के कब्जे में है। प्रशासन के सूत्रों के अनुसार 1999 में जब सरकार के एक निर्णय के तहत फैक्टरी परिसर का कब्जा उद्योग विभाग से कलेक्टर (गैस त्रासदी एवं पुनर्वास) को सौंपा था, तब सुरक्षा का जिम्मा प्राइवेट सिक्युरिटी एजेंसी के हाथों था। जून 2003 से प्रशासन ने यहां होमगार्ड जवान तैनात कर दिए।…