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...पर क्या इससे उकताकर जीना छोड़ देंगे?

By संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 25/12/2021 - शनि, 12/25/2021 - 18:12

जीने की सम्भावनाओं के बीच हम जीने के बजाय अमर होने की चाह लिए रहते हैं। अपने हर कर्म, विचार को इस कसौटी पर तौलते हैं कि मेरे बाद मेरे साथ यह संलग्न न रहे, या मुझे यश देकर अमर कर दे। इस सबमें जीने का मज़ा भूलते हैं। याद रखना चाहिए कि मरने के बाद तो हम कम से कम हजार वर्ष ज़िन्दा रहेंगे ही। जब तक कि हमारी स्मृतियाँ किसी न किसी में क्षणांश भर के लिए भी बनी हैं। पर आज जो अपने ज़ेहन में सुखद स्मृतियों के बजाय अवसाद, तनाव और कटुता एकत्रित कर रहे हैं, उससे तो जीने का मज़ा ही खत्म हो जाएगा। सब भूलकर बस आनन्द से जी लो, कोई किसी को न सुधार सकता है, न बिगाड़ सकता है। और न ही आप-हम पर

भोपाल गैस त्रासदी घृणित विश्वासघात की कहानी है

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 24/12/2021 - शुक्र, 12/24/2021 - 21:17

कलपेश (याग्निक) जी की टिप्पणी है…

मुट्ठी भर मठाधीश, पांच लाख निर्दोषों को छल रहे हैं। पूरे 26 बरस से। तब ये बेगुनाह निर्ममता से बर्बाद कर दिए गए। अब निर्लज्जता से प्रताड़ित किए जा रहे हैं। कानून के नाम पर। किंतु अन्याय की सीमा होती है। न्याय करने वाले हर व्यवस्था में होते ही हैं। दुखद यह है कि उन्हें झकझोरना पड़ता है। भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालती आदेश के बाद ऐसा करने का समय आ गया है। 

वे निशाने पर आने लगे, वे दामन बचाने लगे!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 23/12/2021 - गुरु, 12/23/2021 - 22:04

हादसे के जिम्मेदारों को लेकर अब तक यहां-वहां मंडराते रहे कई अहम सवाल सतह पर आकर देश भर गरमागरम बहस का विषय बन चुके थे। जैसे अचानक ज्वालामुखी फटा और लावा बाहर बह निकला। जो जवाबदेह थे और जीवित थे, वे निशाने पर आ गए। लेकिन हर कोई बच रहा था और दूसरों पर जिम्मेदारी डाल रहा था। जो दिवंगत थे, वे भी सुर्खियों में समाने लगे।… 

एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली ले जाने का आदेश अर्जुन सिंह के निवास से मिला था

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 21/12/2021 - मंगल, 12/21/2021 - 22:07

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह से उस व्यक्ति का नाम बताने का आग्रह किया है, जिसने उन्हें एंडरसन को तत्काल रिहाई की व्यवस्था करने को कहा था। इस बाबत उन्होंने श्री सिंह को एक पत्र लिखा है। इसमें मुख्यमंत्री ने लिखा कि पिछले 72 घंटों (फैसला आने के बाद) से देश इंतजार कर रहा है कि आप इस मामले में सच्चाई उजागर करें मप्र और खासतौर से भोपाल की जनता को यह अधिकार है कि वह अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री से हकीकत जान सके। चौहान साहब, ऐसे मासूम मत बनो। आप भी जानते हो कि ऐसी चिट्ठियों को कितनी संजीदगी से लिया जाता है। यह मानना पड़ेगा कि आपका यह वक्तव्य जरूर

सम्यक् ज्ञान : ...का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात!

By अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 21/12/2021 - मंगल, 12/21/2021 - 19:38

जो चीज जैसी है, उसे वैसे ही जानना, न कम, न ज़्यादा, अवस्था के अनुरूप जानना, उसका सम्यक् बोध होना ही सम्यक् ज्ञान है। सम्यक् ज्ञान क्या नहीं है? यह जानना सम्भवत: सम्यक् ज्ञान से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया। सम्यक् ज्ञान के अभाव में हम अक्सर दूसरों को तो चोट पहुँचाते ही हैं। उससे भी अधिक ख़ुद को आत्मिक चोट देते रहते हैं। सबसे बड़ी बात इस आत्मिक क्षति का अहसास हमें अक्सर नहीं हो पाता। 

प्लांट की सुरक्षा के लिए सब लापरवाह, बस, एंडरसन के लिए दिखाई परवाह

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 20/12/2021 - सोम, 12/20/2021 - 23:39

सीजेएम कोर्ट के फैसले का पूर्व जिला न्यायाधीश रेणु शर्मा ने अध्ययन किया। इसमें वे बता रही हैं कि यूनियन कार्बाइड में किस कदर तकनीकी खामियां थीं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। भोपाल प्लांट की डिजाइन में न सिर्फ खामियां थीं बल्कि उसमें सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया गया। कोर्ट द्वारा दिए फैसले में यह बात सामने आई कि फैक्टरी में ऐसी किसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया जिससे कार्बाइड प्लांट में गैस लीक होने की जानकारी तत्काल मिल सके। यह पूरी तरह मानव अनुभव पर ही निर्भर थी।

अपनी लड़ाई की हार जीत हमें ही स्वर्ण अक्षरों में लिखनी है

By संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 18/12/2021 - शनि, 12/18/2021 - 21:35

आसमान में एक लम्बी सफ़ेद धुएँ की लकीर रह गई है। मानो कोई बहुत तेजी से गुजरा हो अपने पीछे पूरा ग़ुबार छोड़कर। इस सबके साथ सफ़ेद बादलों का झुंड, घर लौटते पक्षियों के समूह जिनका रंग साफ़ नज़र नहीं आता। ऊँचे टॉवर, उनसे ऊँचे पेड़ और क्षितिज की तलाश में सूरज का पीछा करते जाना और अन्त में जहाँ से मैं देख रहा हूँ, डूब जाना। क्या यही हश्र रह गया है जीवन का? 

केंद्र के साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/12/2021 - शुक्र, 12/17/2021 - 17:45

…केंद्र में सरकार तब राजीव गांधी की थी। लाल साहब के इस खुलासे (केंद्र सरकार की ओर से साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए।) पर केंद्र की मौजूदा सरकार (फैसले के वक्त भी कांग्रेस की ही थी) अपनी खाल नहीं बचाएगी तो और क्या करेगी? तो तत्काल प्रभाव से वीरप्पा मोइली (तत्कालीन कानून मंत्री) ने लाल को ही लपेट दिया। मोइली ने कहा कि एंडरसन अगर पकड़ से बाहर हैं तो उसके लिए सीबीआई के तत्कालीन जांच अधिकारी बीआर लाल ही जिम्मेदार हैं। उन्हीं की वजह से आज एंडरसन के प्रत्यर्पण में दिक्कतें आ रही हैं। 

कानून मंत्री भूल गए...इंसाफ दफन करने के इंतजाम उन्हीं की पार्टी ने किए थे!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 16/12/2021 - गुरु, 12/16/2021 - 06:54

…केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली को अब पता चला है कि इंसाफ दफन हो गया है। उनका यही कथन आज (आठ जून 2010) की पहली सुर्खी है। यह उनका दिल्ली में दिया गया बयान है। अदालत के फैसले पर जब कैमरे सामने और माइक मुंह पर लगे तो मंत्री महोदय ने यह फरमाया। वे उस अतीत को भूल गए, जब इंसाफ को दफन करने के लिए ताबूत, रस्सी, कीलों और कब्र की खुदाई के लिए गैंती-फावड़े उन्हीं की पार्टी के सत्ताधारी नुमाइंदों ने तैयार कराए थे। अफसरों को उन्होंने रोजगार गारंटी योजना के जॉब कार्डधारी मजदूरों की तरह इस काम में लगा दिया था। किसी के जॉब कार्ड पर लिखा था कलेक्टर, किसी के कार्ड पर एसपी… 

भगवान महावीर ने अपने उपदेशों में जिन तीन रत्नों की चर्चा की, वे कौन से हैं?

By अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 14/12/2021 - मंगल, 12/14/2021 - 21:09

पृथ्वी पर तीन रत्न हैं। पहला- जल, दूसरा- अन्न और तीसरा- अच्छे बोल (पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्)। हम अक्सर जो भी बेहतर होता है, उसके प्रति उदासीन ही रहते हैं। क्योंकि हम एकदम आकर्षित करने वाली चीजों के प्रति आसक्त रहते हैं। यह एक सामान्य स्वभाव है और इसको बदलना कठिन है। इसीलिए कठिन चीजों को अपनाना तप हो जाता है। तप सामान्य सी दिखने वाली चीजें अपनाना भी है। इसलिए भगवान महावीर ने अपने उपदेशों में तीन रत्नों की चर्चा की है। जो जैन मत के मुख्य आधार हैं। पहला- सम्यक् दर्शन, दूसरा- सम्यक् ज्ञान और तीसरा- सम्यक् चरित्र। इनमें  सम्

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