आज के बुलेटिन में जानिएः
आवाजों का शोर है। इधर जीवन में एक और आवाज़ जुड़ी है, ठन- ठन-ठन, चौबीसों घण्टे गूँज रही है। हर समय सोते-जागते, यह आवाज़ पीछा नही छोड़ रही, छाती को फाड़कर, गले को चीरकर निकल रही है।
हम तय वक्त पर मोतीसिंह के घर पहुंचे। दुआ-सलाम से ही लग गया कि वे तेल चुपड़े पहलवान की तरह सामने विराजित हैं, जो यह तय करके बैठे थे कि पकड़ में नहीं आना है। इसलिए दिसंबर 1984 के किसी भी सवाल पर उनका रटा रटाया सा जवाब मिलता-'नो कमेंट।’ कोई और बात कीजिए। उन्होंने कहा कि इस मीटिंग के पहले हम तय कर चुके हैं कि इस बारे में कोई बात नहीं होगी। यह समय गुजर जाने दीजिए फिर इत्मीनान से इस बारे में बात होगी। हादसे से जुड़े हर सवाल पर वे एक और बात दोहराते गए, 'मेरी किताब पढ़िए। उसमें मैंने सब कुछ लिख दिया है। आपके हर सवाल का जवाब मेरी किताब में है। '
आज के बुलेटिन में जानिएः
विशेष आग्रहः यदि आपके पास भी हों कोई अपडेट और डायरी के जरिए लोगों तक पहुँचाना चाहते हों तो हमें लिखिए। हमा आपसे सम्पर्क करेंगे।
गैस हादसा भोपाल के इतिहास में अकेली ऐसी त्रासदी नहीं है, जिसमें सियासत की साजिश, झूठ, फरेब, धोखे और बेकसूर लोगों की बेहिसाब मौतों के किस्से शुमार हों। रियासत के रूप में इसकी पैदाइश ऐसी ही त्रासदियों के बीच हुई है। यह कहानी शुरू होती है, अफगानिस्तान से एक महात्वाकांक्षी नौजवान के इस इलाके में कदम रखते ही। बेहतर कल और जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तलाश में वह यहां आया था। बीस साल का वह नौजवान सबसे पहले दिल्ली के पास जलालाबाद में टिका। औरंगजेब की मौत के बाद मुगलिया सल्तनत में मची अफरातफरी और छीना झपटी के उस पागल दौर में उसकी तकदीर उसे मौजूदा मध्यप्रदेश की सीमाओं में ले आई। विद
आज के बुलेटिन में जानिएः
अदालत ने फैसला सरकाकर चिराग घिस दिया था। जिन्न बाहर आ चुका था। संभवत: देश के इतिहास में यह अकेला मामला है, जिसका हर तथ्य ढाई दशक पुराना था। नया कुछ नहीं था। सिवाय एक फैसले के जो अपने कानूनी दायरे में पहले से तय था। लेकिन इस फैसले के बाद घटनाएं ऐसी जुड़ी कि पुरानी बोतलों में से एक से बढ़कर एक जिन्न बाहर आए। कई चेहरे बेनकाब हुए। कई सच्चाइयों से पहली बार परदा उठा। अनगिनत भूले-बिसरे सच एक श्रृंखला में सामने आ गए।
कक्षा छठवीं की संस्कृत की पाठ्यपुस्तक में एक श्लोक है,
“सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः। सत्येन वाति वायुश्च, सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्।।”
भावार्थ है कि सत्य के कारण पृथ्वी स्थिर है। सत्य के कारण सूर्य अपनी ऊष्मा प्रदान करता है। सत्य के कारण वायु बहती है। इस संसार में सब कुछ सत्य से ही प्रतिष्ठित है।
स्कूली बच्चों के लिए प्रमुख समाचारों के आज के इस ख़ास बुलेटिन में अपने बच्चों को सुनाइएः
मध्यप्रदेश में अर्जुनसिंह को एक रहमदिल और मददगार नेता मानने वाले मीडिया में भी कम नहीं हैं। कई वरिष्ठ साथी अपने अनुभव से उदाहरण भी गिनाते हैं। किसी गरीब की बेटी की शादी का प्रसंग हो, किसी जरूरतमंद को नौकरी की दरकार हो या किसी बीमार आदमी को इलाज की जरूरत। ऐसे नितांत निजी मामलों की जानकारी मिलते ही वे बतौर मुख्यमंत्री खुद दिलचस्पी लेकर फौरन मदद दिलाने में कभी पीछे नहीं रहते थे। ऐसे अनगिनत किस्से लोगों को याद हैं कि उन्होंने किस-किस तरह से लोगों को वक्त जरूरत मदद दिलाई। लेकिन उनकी छवि का यह उजला और प्रेरक पहलू उस तस्वीर से कतई मेल नहीं खाता, जो गैस हादसे में दुनिया के सामने आई। उन जैसे मानवीय