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हम सब बेहद तकलीफ में है ज़रूर, पर रास्ते खुल रहे हैं

By संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 11/12/2021 - शनि, 12/11/2021 - 21:01

परछाइयाँ बहुत गहरी हैं। हम सब बहुत तकलीफ़ में हैं। उम्र का लम्बा पड़ाव बीत गया है और कुल जमा हासिल अगर यह था या ये होने वाला था तो ज़िन्दगी की सभी शर्तें नामंज़ूर हैं और मैं सब लौटाकर फिर से शून्य पर लौटना चाहता हूँ। एक नई ताक़त और जोश के साथ, नई दिशाएँ तलाशने और वो सब कुछ पाने को जो खिलन्दड़पन से हासिल हो सकता है। मुझे नहीं चाहिए ये ख़ौफ़, वहशत और अंधेरे बन्द कमरों की सौग़ातें। 

एंडरसन को जब फैसले की जानकारी मिली होगी तो उसकी प्रतिक्रिया कैसी रही होगी?

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 8/12/2021 - मंगल, 12/07/2021 - 23:14

इस पहले से तय फैसले और 25 साल पहले हुए हादसे में नया यह भी था कि इस बार तमाम टीवी चैनल भी मीडिया के फलक पर वजूद में थे। रोजाना सुबह से करिस्माती और सनसनीखेज सुख के शिकार में भटकने वाले टीवी पत्रकारों के लिए अदालत के सामने नाराज लोगों की भीड़ और एक ऐसे मामले का फैसला एक बड़ी खबर थी, जिसमें 15 हजार से ज्यादा लोग मौत के मुंह में चले गए थे, हजारों हमेशा के लिए बीमार बेकार हो गए थे। ये सब उस गैस के शिकार थे, जो यूनियन कार्बाइड के प्लांट से दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात लीक हुई थी। तब टीवी चैनल नहीं थे। सिर्फ दूरदर्शन था। वह भी आज के खबरी चैनलों की तरह चौबीस घंटे खबरों से भरा नहीं रहता था

हादसे के जिम्मेदारों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी, जो मिसाल बनती, लेकिन...

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 7/12/2021 - मंगल, 12/07/2021 - 23:03

फैसला सामने आते ही दोपहर बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक जानकारों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं… 

25 साल (अब 37) से गैस त्रासदी के मामले से या तो बेखवर या तमाशे की तरह देख रहे नेताओं ने घड़ियाली आंसू बहाए। जांच एजेंसियों ने सरकारी किस्म के बयान दिए। गैस पीड़ित संगठनों ने अफसोस जताने की रस्म अदायगी की। 

फैसला आते ही आरोपियों को जमानत और पिछले दरवाज़े से रिहाई

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 5/12/2021 - रवि, 12/05/2021 - 23:41

हादसे के बाद सात दिसंबर 1984 को एंडरसन भोपाल आया था। हनुमानगंज थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। वह 25 हजार के मुचलके पर रिहा कर दिया गया। मुचलके की भाषा गोखले ने एंडरसन को पढ़कर सुनाई थी। इसके बाद एंडरसन ने उस पर दस्तखत किए थे। फिर उसे सरकारी विमान से दिल्ली रवाना कर दिया गया। 25 साल (अब 37) बीत गए हैं। इस बीच दुनिया बदल चुकी है। लेकिन हादसे के पीड़ितों के लिए वक्त वहीं ठहर गया। जिंदगी एक बोझ बन गई, जिसे वे अब तक ढो रहे हैं।…

फैसला, जिसमें देर भी गजब की और अंधेर भी जबर्दस्त!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 4/12/2021 - शनि, 12/04/2021 - 22:24

…भोपाल के लिए आज का दिन कुछ खास है। राजधानी की नई जिला अदालत से आज एक खास फैसला आने वाला है। एक ऐसा फैसला जिसमें देर भी गजब की है और अंधेर भी जबर्दस्त। यह 25 साल पुरानी भोपाल की भयानक गैस त्रासदी का मामला है, जिस पर दुनिया भर की निगाहें हैं। मीडिया खासतौर से उत्साहित है।…चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मोहन पी. तिवारी के कोर्ट रूम से आने वाली खबरों का सबको बेसब्री से इंतजार है। वे ही फैसला सुनाने वाले हैं।

जीवन इसी का नाम है, ख़तरों और सुरक्षित घेरे के बीच से निकलकर पार हो जाना

By संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 4/12/2021 - शनि, 12/04/2021 - 19:55

भीड़भरे शहरों में अक्सर रहा हूँ, जहाँ ट्रैफिक सिग्नल को देखते-समझते ही उम्र के दशक गुजरते जाते हैं। हम भीड़ में फँसे हों और सामने की गाड़ियाँ सरक रही हों, तो दस बार लाल-हरी बत्ती को देखते-देखते अधीरता भी ख़त्म होने लगती है। एक उकताहट सी होने लगती है। अन्त में जब हमारा नम्बर आता है तो अक्सर हमें लाल और हरे के बीच पीले वाले समय मे क्रॉस करना पड़ता है। जीवन इसी का नाम है, ख़तरों और सुरक्षित घेरे के बीच से निकलकर पार हो जाना। 

गैस त्रासदी...जिसने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को सरे बाजार नंगा किया!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 3/12/2021 - शुक्र, 12/03/2021 - 12:14

‘भोपाल गैस त्रासदी : आधी रात का सच’, यह ऐसी कहानी है, जिसमें एक अदालती फैसले के सिवाय नया कुछ नहीं है। भोपाल में ज्यादातर तथ्य पहले से सब जानते हैं। लेकिन हादसे के बाद बीते इन (37) सालों में देश में एक नई पीढ़ी तैयार हुई है। उसे शायद ही हादसे की सच्चाइयाँ मालूम हों। शायद उसकी कोई दिलचस्पी भी न हो। जबकि उन्हें पता होना चाहिए कि जिस व्यवस्था में वे जिंदगी गुजारने वाले हैं, वह कैसी है? सत्ताधीशों को क्या करना चाहिए और करते क्या हैं? खासतौर से तब जब एक शहर ने हजारों लाश को सड़कों पर कीड़े-मकोड़ों की तरह पड़ा देखा हो। ऐसे कठिन समय में उनसे क्या उम्मीद की जानी चाहिए?

जाे जिनेन्द्र कहे गए, वे कौन लोग हैं और क्यों?

By अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 30/11/2021 - मंगल, 11/30/2021 - 21:00

इन्द्रियों को जीत लिया है जिस व्यक्ति ने, वह जिन या जिनेन्द्र आदि विशेषणों से पुकारा जाता है। भारतीय धर्म-दर्शन इन्द्रियों पर विजय पाने की महत्त्वपूर्ण चर्चा करता है। प्रत्येक महर्षि, प्रत्येक महात्मा जितेन्द्रिय होने का उपदेश देते हैं। कठोपनिषद में ऋषि कहते हैं कि इन्द्रिय आदि का संयुक्त रूप यह शरीर मैं नहीं हूँ। इससे अलग विलक्षण नित्य चेतना हूँ। जो ऐसा जान लेता है, वह व्यक्ति सदा के लिए दुःख से रहित हो जाता है। 

जीवन में हमें ग़लत साबित करने वाले बहुत मिलेंगे, पर हम हमेशा ग़लत नहीं होते

By संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 27/11/2021 - शनि, 11/27/2021 - 21:03

एक मैयत में गया था आज। घर में तो सब ठीक था। रास्ते में भी दुख उमग रहा था। पर श्मशान में मुखाग्नि से कपाल क्रिया के बीच फुर्सत के घंटों में हम सब लोगों ने उस मृतक को इतना ग़लत साबित किया कि यदि वह सुन लेता तो शायद जन्म के क्षण ही मरने का निश्चय कर लेता। दिलचस्प यह कि बाहर निकलते समय श्मशान वैराग्य का टैग सबके मन मस्तिष्क और आत्मा पर नत्थी था। 

स्वच्छता अभियान पर गैर-राजनीतिक चर्चा!

By ए. जयजीत, भोपाल, मध्य प्रदेश से, 25/11/2021 - गुरु, 11/25/2021 - 23:45

दो अधेड़ और काफ़ी हद तक प्रबुद्ध सुअर, हाँ भाई सुअर ही, अपनी किसी राष्ट्रीय समस्या पर चर्चा कर रहे हैं। चूँकि दोनों प्रबुद्ध हैं तो सुअर होने की नियति से ऊपर उठकर चर्चा करना उनका नैतिक दायित्व है। वे इस समय देश में स्वच्छता की समस्या पर चर्चा कर रहे हैं। उनके लिए स्वच्छता ही समस्या है। चूँकि समस्या

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