आज के बुलेटिन में ख़ास
- पिछले साल 4 मौके मिले थे और इनमें से सर्वश्रेष्ठ मान्य था - पिछले साल करीब 25 लाख छात्रों ने जेईई परीक्षा दी थी - इस बार के लिए इस महीने के आखिर में रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे - बप्पी लाहिड़ी का निधन, महज 3 साल की उम्र से संगीत में हाथ आज़माना शुरू कर दिया था - भाग्य के लिए गले और हाथों में बप्पी खूब सारे सोने के गहने पहना करते थे
आज के बुलेटिन में ख़ास
आज के बुलेटिन में खासः
बहुत दिनों में कल किसी से बातचीत में कड़क ब्लैक कॉफ़ी का ज़िक्र सुना। अचानक वहाँ से उठा और सीधा घर चला आया। अपनी रसोई में ब्लैक कॉफ़ी के पाउच खोजता रहा। बहुत सारे पाउच थे मेरे पास। लगभग सारे गिफ़्ट में मिले थे और कुछ ख़रीदे थे। कॉफ़ी के रोस्टेड बीज थे, जिन्हें ताज़ा कूटकर कॉफ़ी बनाना पसन्द था। कुछ ऐसे बीज थे, जो किसी जानवर के खाने के बाद उसके मल में से निकालते हैं। फिर उन्हें प्रोसेस करके बेचा जाता है। ये सब बहुत महंगे थे।
एक पल स्थिर हो जाना, एक पल ठहर जाना। एक पल की खुशी, एक पल के दुख में जीवन खपा देना। एक पल के इंतज़ार की पीड़ा, एक पल की मुलाकात। एक पल ठिठुरना, एक पल की मुस्कुराहट। एक पल का साथ, एक पल में सब कुछ छोड़कर गुजर जाना। एक पल में विलोपित हो जाना और एक पल में ख़त्म हो जाना। और इस एक पल का यूँ आना और ढाढ़स बँधाते हुए उसी पल में विलीन हो जाना कितना विचित्र है न?
आज के बुलेटिन में ख़ासः
मंत्री समूह की बैठक से संकेत मिले हैं कि सरकार पीड़ितों के लिए तीन हजार करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित कर सकती है। ये राशि योजना आयोग द्वारा मंजूर 982 करोड़ की उस रकम से अलग होगी जिसे अब केवल मंत्री समूह की हरी झंडी मिलना बाकी है। दूसरी और केंद्र सरकार का एंडरसन पर रुख भी साफ हो गया है। बैठक में सदस्यों को सौंपे गए एजेंडे से संकेत मिले हैं कि सरकार एंडरसन के प्रत्यर्पण पर जोर नहीं देना चाहती, सारा जोर अब मुआवजे पर ही होगा। हालांकि मंत्री समूह डाऊ केमिकल की जवाबदेही तय करने जा रहा है।…
पटरियों ने हमेशा समानान्तर रहकर मूक साथ निभाया। पहाड़ों ने धरती और आकाश के बीच रहकर जोड़ने का काम किया। नदियाँ अपने उद्गम से निकलीं तो समुद्र में मिल जाने तक कल-कल करती रहीं। उसका रोना किसी ने नहीं देखा। अनथक चलती रहीं, जोड़तीं रहीं। जो मिला, उसे अपने में समा लिया और कभी उफ्फ़ नहीं किया किसी से।
आज के बुलेटिन में ख़ासः
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भगवान महावीर के पांच महाव्रतों में अंतिम महाव्रत है अपरिग्रह। बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है और साथ ही कठिन। सम्भवत: इसी बात को ध्यान में रखकर सबसे अन्त में इसका उल्लेख किया है। सत्य बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन करना किसी वस्तु का त्याग कर देना आसान है, अपरिग्रह के मुकाबले। तो चलिए! पहले अपरिग्रह को समझ लेते हैं कि ये है क्या?