अमेरिका में भारत के एटार्नी हिमांशु राजन शर्मा से संपर्क किया है। …..अमेरिका में कानून की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही हिमांशु राजन शर्मा गैस पीड़ितों की लड़ाई लड़ने में जुट गए थे। वे न्यूयॉर्क में शर्मा एंड डीयंग नाम की लॉ फर्म में पार्टनर हैं और गैस मामले में भारत के एटॉनी भी । साथ ही न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन और उसके तत्कालीन चेयरमैन वारेन एंडरसन के खिलाफ 2007 में जानकी लाल साहू और अन्य द्वारा दायर मुकदमे में लीडिंग वकील वे ही हैं। उनकी विशेषज्ञता मुश्किल अंतरराष्ट्रीय मुकदमे हैं। गैस पीड़ितों में से कुछ लोगों से स्वयं संपर्क कर उनके लिए उन्होंने न्यूयॉर
नव-वर्ष, नव-संवत्सर, माँ दुर्गा की आराधना के नव-दिवस और इस मौके पर भरत-नाट्यम नृत्य के साथ माँ महिषासुरमर्दिनी की स्तुति, आराधना। भोपाल, मध्य प्रदेश की जानी-मानी नृत्यांगना लता सिंह मुंशी की शिष्या वैष्णवी द्विवेदी ने यह प्रयास किया है। उनका प्रयास किस स्तर का रहा, यह कमेंट सेक्शन में बताया जा सकता है। #अपनीडिजिटलडायरी के साहित्य, संस्कृति, भाषा, कला आदि से जुड़े सरोकार हैं। इसलिए डायरी लगातार इस तरह
सीबीआई के पूर्व निदेशक जे.एस बावा, जोगिंदर सिंह और मौजूदा निदेशक : केंद्र सरकार से पूरी तौर पर बंधी सीबीआई के पास यह मामला हादसे के कुछ ही घंटों में पहुंच गया था। उसी दिन दिल्ली से सीबीआई का जांचदल भी भोपाल पहुंच गया। फिर ऐसा क्या था जिसके कारण सीबीआई को केस के कागज़ पुलिस से लेने में छह दिन लग गए। सीबीआई ने भी इसे धारा 304-ए के तहत दर्ज किया। जबकि उस समय तक पुलिस इस मामले में धारा-304 पहले ही लगा चुकी थी। तत्कालीन निदेशक बावा के कार्यकाल में सीबीआई ने पुलिस से पूछा ही नहीं कि मुख्य अभियुक्त वारेन एंडरसन को किन हालातों में रिहा कर दिया गया और क्यों?
आठ- सीआर कृष्णास्वामी राव, केबिनेट सचिव : केंद्र सरकार के शीर्ष नौकरशाह, जो प्रधानमंत्री से बंधे थे। मध्यप्रदेश के मुख्यसचिव ब्रह्मस्वरूप से जुड़े थे। मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने ही तब भोपाल में मीडिया को जानकारी दी थी कि उनके मुख्य सचिव दिल्ली में मंत्रिमंडलीय सचिव के संपर्क में हैं। एंडरसन मामले में केंद्र और राज्य के बीच दिल्ली की सर्वोच्च प्रशासनिक कड़ी। इनके स्तर पर बहुत संभव है कि नरसिंहराव या राजीव गांधी ने ही इन्हें मध्यप्रदेश सरकार से बात करने और एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली रवाना करने को कहा हो। इन्होंने मुख्यसचिव को केंद्र की मंशा से अवगत कराया हो। तत्कालीन भोप
होलीकोत्सव रंगों का उत्सव है। इसमें कोई भी रंग किसी से अलग नहीं बल्कि सभी मिलकर एक-रंग हो जाते हैं। हमारा देश अपनी विविधताओं से, विविध रंगों से उज्ज्वल है। हम ऊपरी तौर पर भले अलग-अलग दिखाई दें लेकिन भारतीय के तौर पर हम केवल भारत के एक नागरिक हैं। शुभम् आर्यन ने अपनी छोटे से चलचित्र के माध्यम से ऐसा ही सुन्दर सन्देश देने का प्रयास किया है। इसको सार्थक बनाते हुए आइए हम सभी भारतीयता के रंग से सराबोर हों भारत को सम्पन्न, समृद्ध, खुशहाल और श्रेष्ठ बनाएँ।
सभी को #अपनीडिजिटलडायरी की तरफ से रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।
छह- अर्जुनसिंह, मुख्यमंत्री : राजीव गांधी के दबाव में और एंडरसन के प्रभाव में थे। चुनाव के समय आए इस संकट में अपनी पोजीशन को बनाए और बचाए रखते हुए उन्हें एक साथ तीन को संतुष्ट करना था। पहला प्रधानमंत्री के नाते राजीव गांधी, दूसरा- अमेरिकी आभामंडल के प्रतीक एंडरसन और तीसरा- यहां की पीड़ित-प्रताड़ित जनता। एंडरसन की कसौटी पर ये खरे उतरे, क्योंकि जाते वक्त वह उन्हें गुड-गवर्नेस का तमगा देकर गया। कानूनी खानापूर्ति के लिए एंडरसन की गिरफ्तारी कराई, लेकिन गैर-कानूनी तौर पर उसे जाने भी दिया। ऐसा करके इन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे। पहला- चुनावी मौसम में हुए भयानक गैस हादसे स
एंडरसन की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने अपना री-प्रजेंटेशन दिया, उसे ही केंद्र ने दबाव समझ लिया। अमेरिकी सरकार की ओर से सीधे तौर पर किसी दबाव के सबूत भी नहीं हैं। न तो रीगन ने राजीव से बात की और न ही व्हाइट हाऊस प्रवक्ता ने अपने बयान में ऐसी कोई जानकारी दी। केवल अमेरिकी आग्रह के बाद यहां हर स्तर पर आंखें बंद करके फैसले होते चले गए। कहीं से भी यह आवाज नहीं उठी कि एंडरसन को छोड़ना गैरकानूनी है।… आइए विस्तार से समझें कि कौन किससे बंधा था, जुड़ा था, प्रभाव या दबाव में था और किन किरदारों ने एंडरसन को बाइज्जत जाने का मौका दिया।…
गैस त्रासदी मामले को रीओपन करने की तैयारियों के बीच इस बार सुप्रीम कोर्ट में गैस पीड़ितों की नुमाइंदगी एडीशनल सॉलिसीटर जनरल विवेक तन्खा कर सकते हैं। तन्खा प्रदेश सरकार की ओर से गठित विधि विशेषज्ञों की समिति चेयरमैन भी हैं। यही समिति केस को रीओपन करने की रणनीति तैयार करने में लगी है। प्रदेश के विधि मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हम जरूर चाहेंगे कि इस मामले में तन्खा गैस पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा सरकार का पूरा प्रयास होगा कि सत्र न्यायालय सहित एपेक्स कोर्ट में भी दिग्गज वकीलों का पैनल खड़ा हो।
भोपाल में भाजपा ने धरना-प्रदर्शन के जरिए मामले को और गरमाने की कोशिश की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज काली साड़ी पहनकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा है कि गैस पीड़ितों को न्याय और राहत दिलाने के लिए भाजपा लोकसभा सत्र के पहले दिन सदन में केस फिर खुलवाने के लिए प्रस्ताव पेश करेगी। साथ ही नियम 184 के तहत 1989 के समझौते को रद्द कर नए समझौता की मांग करेगी। इसमें पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा और दोषियों को सजा दिलाने की बात शामिल होगी। नियम 184 में पेश प्रस्ताव पर वोटिंग होती है। ऐसे में यदि कांग्रेस इसके खिलाफ वोटिंग करेगी तो उसकी कलई खुल जाएगी। उन
मंत्री समूह की बैठक से संकेत मिले हैं कि सरकार पीड़ितों के लिए तीन हजार करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित कर सकती है। ये राशि योजना आयोग द्वारा मंजूर 982 करोड़ की उस रकम से अलग होगी जिसे अब केवल मंत्री समूह की हरी झंडी मिलना बाकी है। दूसरी और केंद्र सरकार का एंडरसन पर रुख भी साफ हो गया है। बैठक में सदस्यों को सौंपे गए एजेंडे से संकेत मिले हैं कि सरकार एंडरसन के प्रत्यर्पण पर जोर नहीं देना चाहती, सारा जोर अब मुआवजे पर ही होगा। हालांकि मंत्री समूह डाऊ केमिकल की जवाबदेही तय करने जा रहा है।…