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मार्च आ गया है, निश्चित ही ब्याज़ आएगा, देर-अबेर, उम्मीद है, फिर,,,

By संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 5/3/2022 - शनि, 03/05/2022 - 19:42

खूब नौकरियाँ पकड़ीं और छोड़ीं। मानो जीवन में यही सब करने के लिए पैदा हुआ था। लोग कहते हैं ईश्वर ने जब जन्म दिया है तो किसी उद्देश्य के साथ ही दिया होगा। संसार में महान और बड़ा काम करने के लिए। हम चौरासी लाख योनियों में भटककर आते हैं और अपने कर्मों से मनुष्य योनि पाने की यह पुण्याई अर्जित करते हैं। लेकिन मुझे कभी नहीं लगा यह। तनाव, अवसाद, त्रासदी और ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाने की क़श्मकश में सुख का मुँह देखा ही नहीं कभी। हमेशा अपने आगे एक समस्या मुँह बाए खड़ी देखी। और जब तक इससे निजात पाता, तब तक अम्बार खड़ा मिलता समस्याओं का। जिन्दगी धूँ-धूँ जलते दानावल में पटकी जाती। जैसे, कोई

नासिक के चंद्रप्रकाश पाटिल को अगर जानते हैं तो भी फिर जाना जा सकता है

By टीम डायरी, 4/3/2022 - शुक्र, 03/04/2022 - 18:15

नासिक, महाराष्ट्र के चन्द्रप्रकाश पाटिल। उन्हें सिर्फ़ नासिक के लोग ही नहीं जानते, देश भर के लोग पहचानते हैं। साल में दो-तीन बार इनके बारे में कहीं न कहीं, कुछ न कुछ ख़बर आती रहती है। हालांकि तब भी सम्भव है कि बहुत से लोग इन्हें न जानते हों। इनके काम को न जानते हों। इसलिए #अपनीडिजिटलडायरी ने भी इनके सरोकारों के साथ जुड़ने की कोशिश की है। इसमें दूसरा मक़सद यह भी है कि भले चन्द्रप्रकाश के प्रयास जाने-माने हैं, लेकिन उनके बारे में बार चर्चा होना ज़रूरी समझा जा सकता है। कहा जाता है न, ‘रसरी आवत जात ही, सिल पर पड़त निसान’। यानि सिल अर्थात् पत्थर पर निशान बनाना है, तो रस्सी को क

पढ़िए...एंडरसरन की रिहाई के लिए कौन, किसके दबाव में था?

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 3/3/2022 - गुरु, 03/03/2022 - 19:10

एंडरसन की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने अपना री-प्रजेंटेशन दिया, उसे ही केंद्र ने दबाव समझ लिया। अमेरिकी सरकार की ओर से सीधे तौर पर किसी दबाव के सबूत भी नहीं हैं। न तो रीगन ने राजीव से बात की और न ही व्हाइट हाऊस प्रवक्ता ने अपने बयान में ऐसी कोई जानकारी दी। केवल अमेरिकी आग्रह के बाद यहां हर स्तर पर आंखें बंद करके फैसले होते चले गए। कहीं से भी यह आवाज नहीं उठी कि एंडरसन को छोड़ना गैरकानूनी है।… आइए विस्तार से समझें कि कौन किससे बंधा था, जुड़ा था, प्रभाव या दबाव में था और किन किरदारों ने एंडरसन को बाइज्जत जाने का मौका दिया।…  

चेतना लक्षणो जीव:, ऐसा क्यों कहा गया है?

By अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 1/3/2022 - मंगल, 03/01/2022 - 22:14

मानव जीवन की जैसे-जैसे समझ विकसित होती है, वैसे-वैसे संसार और जीवन को जानने की मानव की इच्छा बलवती होने लगती है। इसके परिणाम में वह अपनी समझ अपनी बुद्धि और अपने तर्कों का प्रयोग करना शुरू कर देता है। वह तब तक नहीं रुकता जब तक उसके मन में पैदा होने वाले प्रश्न समाप्त नहीं हो जाते। हालाँकि मानव अपनी युक्तियों का प्रयोग जितना अधिक करता है, वह उतना ही अधिक उलझता प्रतीत होता है। कई दर्शन ‘नेति-नेति’ तक कह उठते हैं। और अंततः वह बाहरी समाधान के अभाव में अपने अन्दर की गहराइयों में उतरने लगता है। इस अन्तर्मन की गहराइयों की अनुभूतियों को अपने-अपने अनुभव से अभिव्यक्त करता है। 

चरैवेति, चरैवेति...जीवन में इसका क्या अर्थ है, जानिए इस अहम आयोजन के जरिए

By टीम डायरी, 27/2/2022 - रवि, 02/27/2022 - 17:57

युद्ध के मैदान में महान योद्धा भ्रमित हो उठा है। क्या करे क्या न करे। तब श्रीकृष्ण उसे सहज भाव से अपने क्षत्रिय के कर्त्तव्यों के निर्वाह का आदेश देते हैं। और युद्ध की दिशा निश्चित हो जाती है। 

ऐसे ही, वैदिक ऋषि भी सदैव जीवन के क्षेत्र में स्पष्ट आदेश देता है, “कर्त्तव्य का पालन कीजिए और अवसाद मुक्त रहिए।” 

एक समय ऐसा आता है, जब हम ठहर जाते हैं, अपने आप में

By संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 27/2/2022 - रवि, 02/27/2022 - 17:34

संसार में समुद्रों की कमी नहीं है और इसका अर्थ यह भी है कि पानी की कमी नहीं है। पानी, जो हर कहीं ढल जाता है, रंग रूप बदल लेता है। पर मेरे पास एक मटका है, जिसे मैंने बरसों से सम्हाल रखा है। पानी भरने और उलीचने की नियमित प्रक्रिया में वह इतना पक गया है कि अब उसके फूटने की गुंजाइश बहुत कम बची है। हालाँकि इधर शाम होते ही वह टपकने लगता है। हर 10-20 मिनिट बाद जब एक बूँद गिरती है, तो उसका शोर ब्रम्हांड में यूँ दर्ज होता है, मानो उल्का पिंड टकराए हों। और मैं अब मानकर चलता हूँ कि मटका अब फूटेगा नहीं। यूँ ही टप, टप, टप करके खाली होता जाएगा। एक दिन निर्जल हो जाएगा। फिर उसकी मिट्टी, वह गार जिस पर कुछ न

यह अमेरिका में कुछ खास लोगों के लिए भी बड़ी खबर थी

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 24/2/2022 - गुरु, 02/24/2022 - 18:47

गैस त्रासदी मामले को रीओपन करने की तैयारियों के बीच इस बार सुप्रीम कोर्ट में गैस पीड़ितों की नुमाइंदगी एडीशनल सॉलिसीटर जनरल विवेक तन्खा कर सकते हैं। तन्खा प्रदेश सरकार की ओर से गठित विधि विशेषज्ञों की समिति चेयरमैन भी हैं। यही समिति केस को रीओपन करने की रणनीति तैयार करने में लगी है। प्रदेश के विधि मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हम जरूर चाहेंगे कि इस मामले में तन्खा गैस पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा सरकार का पूरा प्रयास होगा कि सत्र न्यायालय सहित एपेक्स कोर्ट में भी दिग्गज वकीलों का पैनल खड़ा हो। 

जानते हैं, जैन दर्शन में दिगम्बर रहने और वस्त्र धारण करने की परिस्थितियों के बारे में

By अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 22/2/2022  - मंगल, 02/22/2022 - 19:52

आजकल समाज में वस्त्र-विशेष (हिज़ाब) को लेकर उथल-पुथल चल रही है। इसके पक्ष-विपक्ष में अज़ीब-अज़ीब तर्क दिए जा रहे हैं। इसके समर्थक मुँह सहित स्त्री का पूरा शरीर ढँकने सम्बन्धी अपने धार्मिक क़ायदों की दलील दे रहे हैं। वहीं, विरोध करने वाले ये तक कहते सुने जा रहे हैं कि अगर जैन सम्प्रदाय के लोग दिगम्बर होकर कक्षाओं में जाने लगें तो क्या होगा? या नागा साधु विश्वविद्यालय जाने की ज़िद करने लगें तो? 

सब भूलना है, क्योंकि भूले बिना मन मुक्त होगा नहीं

By संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 19/2/2022 - शनि, 02/19/2022 - 21:08

भूलना है बहुत कुछ। मसलन- वे रास्ते जो अब भी ख़्वाबों में भटकते हुए आ जाते हैं। वे बेज़ुबान आँखें जो रास्ता खोज रही थीं। सम्भवतः मंज़िलें भी। पर मैं आसमान से हट ही नहीं रहा था, ज़मीन पर खड़े होकर। मेरे कान उस टिटहरी की ओर लगे थे, जहाँ से अब उसके लौटने की उम्मीद नहीं थी। उन सूनी दुपहरियों को भूलना चाहता हूँ, जहाँ तेज गर्मी में पीपल और बरगद के नीचे गाँव के गाँव खाली पड़े थे महीनों से। और जो लोग चैत काटने गए थे लौटे नहीं थे। कुछ बुज़ुर्गों ने फिर भी मुझसे गुफ़्तगू की थी। एक बच्चे ने हैंडपम्प से खींचकर पानी पिलाया था। उस मिठास और ठंडेपन को भूलना चाहता हूँ। 

सरकारें हादसे की बदबूदार बिछात पर गंदी गोटियां ही चलती नज़र आ रही हैं!

By विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/2/2022 - गुरु, 02/17/2022 - 20:30

भोपाल में भाजपा ने धरना-प्रदर्शन के जरिए मामले को और गरमाने की कोशिश की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज काली साड़ी पहनकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा है कि गैस पीड़ितों को न्याय और राहत दिलाने के लिए भाजपा लोकसभा सत्र के पहले दिन सदन में केस फिर खुलवाने के लिए प्रस्ताव पेश करेगी। साथ ही नियम 184 के तहत 1989 के समझौते को रद्द कर नए समझौता की मांग करेगी। इसमें पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा और दोषियों को सजा दिलाने की बात शामिल होगी। नियम 184 में पेश प्रस्ताव पर वोटिंग होती है। ऐसे में यदि कांग्रेस इसके खिलाफ वोटिंग करेगी तो उसकी कलई खुल जाएगी। उन

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