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प्रतीकात्मक तस्वीर

माँ के रूप में मेरी ज़िन्दगी का सबसे यादग़ार लम्हा, जब बेटी ने पूछा- मम्मा, मैं आपके जैसी कब बनूँगी?

By शिखा पांडे, अहमदाबाद, गुजरात से ; 10/ 8/2020 - सोम, 08/10/2020 - 19:08

मैं शिखा पांडे। अहमदाबाद में अपने छोटे से, प्यारे से परिवार के साथ रहती हूँ। मेरी दो प्यारी सी बेटियाँ हैं। अमिषी और श्रीतिजा। आज सुबह की बात है। मैं कुछ काम कर रही थी। तभी अमिषी मेरे पास आई और बोली, “मम्मा! मैं आपके जैसी कब दिखूँगी? आपके जैसी कब बनूँगी?” मैंने उससे पूछा, “तुम्हें मेरे जैसा बनना है? मेरे जैसा दिखना है?” तो उसका ज़वाब आया, “हाँ मम्मा!

प्रभु की कृपा भयउ सब काजू। जन्म हमार सुफल भा आजू।।

By टीम डायरी ; 5/8/2020 - बुध, 08/05/2020 - 16:55

अयोध्या में बुधवार पाँच अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर के निर्माण का शुभारम्भ हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिन में करीब साढ़े बारह बजे शुभ मुहूर्त में शिला पूजन कर निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया। लगभग पाँच सौ साल के लम्बे संघर्ष के बाद देश आज इस ऐतिहासिक घटना का साक्षी बना है। संघर्ष के दौर में पीढ़ियाँ खप गईं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी आरती डोगरा (बीच में)

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलताओं की नई कहानियों के बीच एक पुरानी कहानी ‘साढ़े तीन फीट’ की भी!

By टीम डायरी ; 5/8/2020 - बुध, 08/05/2020 - 08:53

अभी चार अगस्त (मंगलवार) को ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)-2019 की परीक्षा का अन्तिम नतीज़ा आया है। इसमें हरियाणा के प्रदीप सिंह ने पहला स्थान हासिल किया है। प्रदीप सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी इस पृष्ठभूमि की वज़ह से वे चर्चा में हैं। चौथी बार में उन्होंने यह सफ़लता हासिल की है। शुरू में दो बार सफल नहीं हुए। तीसरी बार 260वाँ स्थान आया और अब पहला। जैसा कि उन्होंने ख़ुद मीडिया के प्रतिनिधियों को बताया, “बीच में एक बार मैंने हार मान ली थी। लगा कि मुझसे नहीं हो पाएगा। तब पिताजी ने हौसला दिया। इसके बाद फिर तैयारी शुरू की और इस मुकाम तक पहुँचा।”

प्रतीकात्मक तस्वीर

‘दोस्तों’ की भारी भीड़ में भी अक्सर हम ख़ुद को अकेला क्यूँ पाते हैं?

By नीलेश द्विवेदी, भोपाल मध्य प्रदेश से; 2/8/2020 - सोम, 08/03/2020 - 01:01

आज (अगस्त का पहला रविवार) मित्रता दिवस था। इस मौके पर कुछ मित्रों के साथ शुभकामना और बधाई सन्देशों का आदान-प्रदान हुआ। इनमें एक मित्र ऐसे रह गए, जिनकी कोई प्रतिक्रिया मुझे मिल नहीं सकी। दौर ऐसा है कि प्रतिक्रिया न मिलने पर चिन्ता लाज़िम हो जाती है। मुझे भी हुई तो मैंने उन्हें फोन कर लिया। फोन पर सम्पर्क स्थापित होते ही उनकी थकी सी आवाज़ सुनाई दी। मैंने पूछा तो उन्होंने बताया, “पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है। बीते 24 घंटे से अस्पताल में भर्ती हैं। रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) नियन्त्रित नहीं हो रहा है।” यह सुनकर मैंने उन्हें यथासम्भव ढाँढस दिया। इस पर वे कुछ भावुक हो गए। मैंने जोर देकर वज़ह जान

प्रतीकात्मक तस्वीर

फिर स्कूल खुलवाने की कोशिशों के बीच क्या ये ख़बर बच्चों के लिहाज़ से चिन्ता बढ़ाने वाली नहीं है?

By टीम डायरी ; 1/7/2020 - शनि, 08/01/2020 - 18:35

कुछ दिनों पहले एक ख़बर पढ़ी थी। विशेष तौर पर मध्य प्रदेश के सन्दर्भ में थी। हालाँकि कमोबेश वैसी स्थिति दूसरे राज्यों में भी हो सकती हैं। सम्भवत: होगी ही। उस ख़बर में बताया गया था कि निजी स्कूलों के असरदार संचालक सरकार में अपने सम्पर्कों के जरिए राज्य शिक्षा विभाग के आला अफ़सरों पर दबाव डाल रहे हैं। उनके द्वारा कोशिश ये की जा रही है कि किसी तरह स्कूलों को फिर खोलने की अनुमति मिल जाए। भले सप्ताह में तीन दिन ही सही। उनकी दलील है कि चूँकि कोरोना महामारी के संक्रमण की वज़ह से की गई देशव्यापी तालाबन्दी अब ख़त्म हो चुकी है। धीरे-धीरे सभी गतिविधियाँ खुल रही हैं। सामान्य हो र

जब कोई ‘दोहरे चरित्र’ के साथ चीन की चुनौती से निपटने की बात करे, तो हँसी क्यूँ न आए भला?

By 10/7/2020 - शनि, 07/18/2020 - 20:11

शुरुआत ताज़ातरीन दो घटनाओं से। अभी आठ तारीख़ की बात है। ख़ुद को राष्ट्रवादी कहने-समझने वाले एक संगठन का सन्देश व्हाट्स ऐप पर प्रसारित हुआ। यह कई समूहों में और तमाम पत्रकारों, बुद्धजीवियों, आदि के पास पहुँचा। लिखा था, “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार के लिए ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित की गई है। ज़ूम एप्लीकेशन पर। तारीख- नौ जुलाई, दोपहर बाद तीन बजे से।”

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

कैसे सनकी चीनी शासकों पर लगाम कसने के लिए कई डोरियाँ तो चीन में ही मौज़ूद हैं?

By सरोकार - शनि, 07/18/2020 - 19:47

भारत के लिए चीन की चुनौती ‘राष्ट्रीय सरोकार’ से जुड़ा मसला है। कैसे? यह हाल की दो ख़बरों से अन्दाज़ा लग सकता है। ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका की ख़बर के मुताबिक चीन ने भारत के लेह-लद्दाख से लगभग 250 किलोमीटर दूर ज़मीन के नीचे 14 सुरंगें बनाईं हैं। यहाँ उसने करीब दो दर्जन मिसाइलों को रखने का इन्तज़ाम किया है। यही नहीं तिब्बत में उसने लड़ाकू विमानों के लिए भी ऐसा ही अड्‌डा तैयार किया है।

पटरी पर रोटी और बेपटरी रोजी!

सोम, 05/25/2020 - 10:56

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास शुक्रवार (आठ मई) तड़के एक मालगाड़ी पटरी पर सो रहे 16 कामगारों को कुचलते, काटते गुजर गई। इस हादसे की जो तस्वीरें आईं, उनमें रेल पटरी पर पड़ी हुई खून से सनी रोटियों की भी तस्वीर थी। वे रोटियाँ जो मज़दूरों ने शायद अगले दिन के लिए बचा रखी थीं। मगर वे उनको खाते, इससे पहले मौत उन्हें खा गई।

बेटा! मेरे नाम की चिट्ठी भेज दे, अब भगवान मुझे बुला ले

सोम, 05/25/2020 - 10:37

ये एक माँ के बोल हैं। सुनकर मन खिन्न रहा दिनभर। समझ नहीं आया कि क्या करूँ, किससे कहूँ। कैसे मदद करूँ। उस माँ की, जिसे किसी से शिकायत नहीं है। बस एक इल्तिजा है। यही कि कोई “भगवान को चिट्ठी लिख दे कि इस बूढ़ी औरत को वह अपने पास बुला ले।”

मई माह, कभी बारात की सामूहिक मेहमाननवाज़ी का महीना भी होता था, याद है?

सोम, 05/25/2020 - 10:35

वैश्विक महामारी ‘कोरोना’ के इस दौर में देशव्यापी तालाबन्दी है। इसलिए शादी-ब्याह भी नहीं हो रहे हैं। वरना अप्रैल, मई, जून के महीनों में तो जैसे हर तरफ़ शादियों की बहार होती है। हालाँकि आज से 20-25 बरस पहले की शादियों जैसी शादियाँ अब कहाँ होती हैं?

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