महाराष्ट्र के कडोली गाँव (हिंगोली जिला) में 11 अक्टूबर 1916 को जब नानाजी देशमुख का जन्म हुआ, उस दिन शरद पूर्णिमा थी। कहा जाता है, शरद पूर्णिमा को चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से विभूषित होता है। पूर्णता को प्राप्त होता है और अपने इस रूप में वह पूरी सृष्टि में अमृत बाँटता है। यह निश्चित रूप से इस तिथि का ही संयोग था कि नानाजी देशमुख का व्यक्तित्तव भी समय के साथ विविध कलाओं (गुणों) से विभूषित हुआ। समय के साथ-साथ पूर्णिमा के चाँद की तरह पूर्णता को प्राप्त होता गया और फिर पूरे समाज को उन्होंने सेवा का अमृत बाँटा।
विजयादशमी, यानि विजय के उद्घोष का दिन। ये उद्घोष अगर ‘शक्ति का, शक्ति द्वारा और शक्ति के लिए’ हो तो? प्रश्न जितना ‘रोचक’ (Interesting) है, उतना ही ‘सोचक’ (Thinkable) भी। और इसका उत्तर ‘द मिस्टिक बैम्बू अकादमी’ के इस वीडियो में है।
इस वीडियो में ‘राग दुर्गा’ सुनाई दे रहा है। दुर्गा यानि शक्ति, जिसकी पूरे देश ने अभी नौ दिनों तक साधना, आराधना की। इस तरह ये ‘शक्ति का नाद’ हुआ।
इसमें सभी वादक-कलाकार महिलाएँ हैं। महिला यानि शक्ति का जीवन्त प्रतीक। लिहाज़ा इस अर्थ में ‘शक्ति का नाद, शक्ति द्वारा’ बन गया।
ये एक विज्ञापन है। लेकिन बेहद प्रासंगिक, संवेदनशील और सामाजिक सन्देश देने वाला। सामाजिक इसलिए क्योंकि मातृशक्ति रूप बेटियों की अहमियत हमेशा ही कम आँके जाने जैसे मसले को छूता है। संवेदनशील इसलिए क्योंकि यह सिर्फ़ स्त्री ही नहीं, समाज में बेहद उपेक्षित जीवन जीने वाले हिजड़ों की संवेदनाओं तक भी पहुँचता है। और प्रासंगिक इसलिए क्योंकि ये अंग्रेजी अवधारणा वाले मातृ दिवस (मदर्स डे) पर जारी हुआ था, जबकि इस वक्त पूरा देश भारतीय संस्कृति वाला नौ-दिनी मातृदिवस मना रहा है।
कर्नाटक सरकार ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए नियम सख़्त किए हैं। अब बिना हैलमेट के गाड़ी चलाने पर चालकों का अनुज्ञा पत्र (Driving license) तीन महीने के लिए निलम्बित कर दिया जाएगा। यह नियम तुरन्त प्रभाव से लागू हो गया है। राज्य परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश में बिना हैलमेट के वाहन चलाने वालों पर लगाम नहीं लग रही है। इसी साल सितम्बर तक सिर्फ़ बेंगलुरू में ही 20.7 लाख लोगों को बिना हैलमेट के गाड़ी चलाते हुए पकड़ा गया। उनक
अभी कुछ रोज पहले तक कर्नाटक (दक्षिण भारतीय) संगीत के एक बड़े गायक हुआ करते थे। नाम था, ‘कुमारी’ अबुबाकेर। जैसा नाम दिलचस्प, वैसा ही काम भी। वे ‘तमिल इस्लामिक कीर्तन’ परम्परा के आख़िरी स्तम्भ थे। ‘कुमारी’ अबुबाकेर के निधन के साथ वह स्तम्भ इसी महीने ढह गया। दुख की ही बात है कि भारतीय सांगीतिक संस्कृति के ऐसे बिरले नाम और परम्परा के धारक तथा साधक को न जीवनकाल में उनके हिस्से का सम्मान मिला, न निधन के बाद। आलम ये कि दक्खन के दो प्रमुख अख़बारों की वेबसाइट
एक कहानी छोटी सी....
उस रोज पेशे से स्कूल शिक्षक सीमा अपनी कक्षा के बच्चों की कॉपियाँ जाँचने के लिए घर ले आई थीं। घर के रोज़मर्रा के कामों से फ़ारिग होने के बाद इत्मीनान से वह बैठक में कॉपियाँ जाँचने बैठी थीं। पति बगल में अपने मोबाइल पर वीडियो गेम खेलने में व्यस्त थे। हमेशा ही रहते थे। बहरहाल, जाँचने के लिए अभी पहले बच्चे की कॉपी का पहला पन्ना ही सीमा ने खोला ही था कि कुछ समय बाद उनके हाथ कॉंपने लगे। आँख से आँसू बहने लगे। आगे सब धुँधला सा गया।
देश में अगले दौर का ‘मानसून’ 25 अक्टूबर के बाद से अपनी आमद दर्ज़ करा सकता है। भारतीय मौसम विभाग ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को यह सम्भावना जताई है। इसे उत्तर-पूर्वी मानसून कहा जाता है। यह रबी की फसलों के लिए अहम होता है। इस मानसून के दौरान तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक आन्ध्र प्रदेश आदि दक्षिण क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सलामती के लिए उपवास कर रहे तेलंगाना के युवक बूसा कृष्णा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। वे 33 साल के थे। उनके परिवार वालों ने बताया कि जब से कृष्णा को पता चला था कि ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया को कोरोना संक्रमण हो गया है, तब से वे परेशान थे। कृष्णा का नाम साल 2018 में सुर्खियों में आया था। तब उन्होंने जनगाँव जिले के कोन्ने गाँव में
बच्चों में पड़ने वाले हर संस्कारों में, वे अच्छे हों या बुरे, परिवेश की भूमिका अहम होती है। ये इस वीडियो को देखकर समझा जा सकता है। इसमें अनन्या पाठक हैं। उम्र सिर्फ 11 साल। लेकिन इतनी उम्र इन्होंने जिस परिवेश में गुजारी, उसने इन्हें शुरुआती तौर पर गढ़ने में अहम भूमिका निभाई है। इसका प्रमाण है, ये गीत जो वे गा रही हैं। अभी 11 अक्टूबर को भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयन्ती पर इन्होंने उन्हीं के एक गीत से उनका स्मरण किया। गीत के बोल हैं, “हर हाथ को देंगे काम, हर खेत को देंगे पानी। दुलहन बनकर फिर से सजेगी अपनी धरती रानी।।”
देश की कई रेलगाड़ियों में अब सामान्य शयनयान डिब्बे (Sleeper Coach) दिखाई नहीं देंगे। इन डिब्बों को चरणबद्ध तरीके से बाहर किया जाएगा। इनकी जगह वातानुकूलित (Airconditioned) शयनयान लगाए जाएँगे। यह व्यवस्था उन रेलगाड़ियों में की जाएगी, जो 130 किलोमीटर प्रतिघंटा या उससे तेज रफ़्तार से चलेंगी। हालाँकि इस बन्दोबस्त के बाद भी इन रेलगाड़ियों में यात्री किराया इतना नहीं ब