प्रिय मुनिया,
आज के एपिसोड में ख़ास
महत्त्वपूर्ण तत्त्वों की चर्चा में अजीव की भी चर्चा आवश्यक है। यह अजीव ही तो है जिसे हम देख पाते हैं। स्पर्श कर पाते हैं। जैन आचार्य कहते हैं जो जीव नहीं, वह अजीव है। जीव का विपरीत अजीव है। अर्थात् जिसमें चेतना नहीं है, जिसमें ज्ञान नहीं है, वह अजीव की श्रेणी में आता है।
आज के एपिसोड में सुनिएः
आठ- सीआर कृष्णास्वामी राव, केबिनेट सचिव : केंद्र सरकार के शीर्ष नौकरशाह, जो प्रधानमंत्री से बंधे थे। मध्यप्रदेश के मुख्यसचिव ब्रह्मस्वरूप से जुड़े थे। मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने ही तब भोपाल में मीडिया को जानकारी दी थी कि उनके मुख्य सचिव दिल्ली में मंत्रिमंडलीय सचिव के संपर्क में हैं। एंडरसन मामले में केंद्र और राज्य के बीच दिल्ली की सर्वोच्च प्रशासनिक कड़ी। इनके स्तर पर बहुत संभव है कि नरसिंहराव या राजीव गांधी ने ही इन्हें मध्यप्रदेश सरकार से बात करने और एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली रवाना करने को कहा हो। इन्होंने मुख्यसचिव को केंद्र की मंशा से अवगत कराया हो। तत्कालीन भोप
आज के इस बुलेटिन में ख़ासः
प्रिय मुनिया,
इस ख़ास पॉडकास्ट शृंखला में कल बात हुई थी दुनिया भर में बदलते मौसम की।
अब इसकी अगली कड़ी में सुनिए, क्यों बदल रहा है मौसम, क्यों बढ़ रहा है धरती का तापमान।
देवांशी ने अपील की है कि अब भी समय है, कि हम ख़ुदगर्ज़ी छोड़कर ठोस कदम उठाएँ।
अपील ये भी है कि आप क्या कर रहे हैं, क्या करने का संकल्प ले रहे हैं, कमेंट कर बताएँ।
आइए अपनी छोटी-छोटी पहलों के ज़रिए हम एक मुहिम शुरू करें। कमेंट्स में बताएँ- आपने क्या किया।
हम श्रृंखला के पिछले भाग में ‘जीव’ को समझने की कोशिश कर रहे थे। जीव चेतना युक्त हो, विवेक पूर्ण हो आदि। उसकी एक विशेषता थी ज्ञानवान होना।
यह ज्ञान बड़ी विचित्र चीज है। इसकी विशेषता है कि हर जीव खुद को ज्ञानवान ही समझता है। इसी ज्ञानवान होने की अनुभूति के कारण ही एक जीव अन्य से प्रेम या ईर्ष्या करता है।
इस ज्ञान की अनुभूति जीवों में प्रेम और ईर्ष्या का कारण ही नहीं अपितु हिंसा और अपराध तक का कारण बनती है। विविध धर्मों के मानने वाले प्रतिधर्म वाले के प्रति वैरभाव तक रखते हैं।
अभी तो मार्च है। जाता हुआ मार्च। याद कीजिए कितना ख़ूबसूरत होता था ये मौसम। लेकिन लोगों ने कूलर-एसी की सर्विस शुरू करा दी है। कुछ के यहां तो चलने भी लगे हैं। आज के इस ख़ास बुलेटिन में जानिए, मौसम के लिहाज़ से कैसा रहेगा ये साल। इसकी अगली कड़ी में देवांशी बताएंगी, क्यों हो रहा है मौसम में इतना परिवर्तन। लेकिन उससे पहले आज सुनिएः