आज के बुलेटिन में ख़ासः
मंत्री समूह की बैठक से संकेत मिले हैं कि सरकार पीड़ितों के लिए तीन हजार करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित कर सकती है। ये राशि योजना आयोग द्वारा मंजूर 982 करोड़ की उस रकम से अलग होगी जिसे अब केवल मंत्री समूह की हरी झंडी मिलना बाकी है। दूसरी और केंद्र सरकार का एंडरसन पर रुख भी साफ हो गया है। बैठक में सदस्यों को सौंपे गए एजेंडे से संकेत मिले हैं कि सरकार एंडरसन के प्रत्यर्पण पर जोर नहीं देना चाहती, सारा जोर अब मुआवजे पर ही होगा। हालांकि मंत्री समूह डाऊ केमिकल की जवाबदेही तय करने जा रहा है।…
आज के बुलेटिन में ख़ासः
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भगवान महावीर के पांच महाव्रतों में अंतिम महाव्रत है अपरिग्रह। बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है और साथ ही कठिन। सम्भवत: इसी बात को ध्यान में रखकर सबसे अन्त में इसका उल्लेख किया है। सत्य बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन करना किसी वस्तु का त्याग कर देना आसान है, अपरिग्रह के मुकाबले। तो चलिए! पहले अपरिग्रह को समझ लेते हैं कि ये है क्या?
पचमढ़ी में किसी भी जगह जाओ- चाहे छोटे झरनों से झरते पानी को छूने के लिए बी-फॉल में नीचे उतरो, छुपने के लिए पांडव गुफ़ा जाओ, धूपगढ़ का सूर्योदय देखो या सूर्यास्त, दर्शन के लिए गुप्त महादेव जाओ या सिर्फ़ यूँ ही यायावरी करते हुए पहाड़ों में घूमते रहो, आपको उस वीराने में कोई न कोई गाने वाला मिल ही जाएगा। एक बूढ़ी औरत को बहुदा मैंने वहाँ देखा है। वह अकेले में अपनी धुन में गाती रहती है। पता नहीं कौन मीरा दीवानी है।
आभासी दुनिया (Vertual World) में कुछ भी हो सकता है। किसी के साथ सामूहिक बलात्कार भी। जी, ब्रिटेन की एक 43 वर्षीय भारतवंशी महिला नीना जेन पटेल ने दावा किया है कि फेसबुक-मेटावर्स (Facbook-Metaverse) के आभासी प्लेटफॉर्म ‘होराइजन वेन्यूज’ (Horizon Venues) में उनके साथ तीन-चार लोगों ने ‘वर्चुअली सामूहिक बलात्कार’ किया। यूजर्स ‘होराइजन वेन्यूज’ में अपने ही आभासी किरदार (Avatar) बनकर एक अलग ही दुनिया में विचरण करते हैं।
आज के बुलेटिन में ख़ासः
आज के बुलेटिन में जानिए
वहाँ इतना अँधेरा था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। इतना कि न नीचे ज़मीन दिख रही थी और न आसमान ऊपर। जब गर्दन घुमाई टेढ़ी करके, एक मौन हर तरफ व्याप्त था। दूर कहीं उजाला था तो कुछ चिंगारियाँ फुनगीनुमा थीं जो उस राख में से फुदक कर उछल पड़ती थीं। यह सब उस भीड़ से बहुत दूर था, जिसके पास हमेशा इस राख और इन चिंगारियों का भय व्याप्त रहता था। इस कटु सत्य को जानते सब थे, मानना कोई नहीं चाहता था।