क्या लद्दाख के मोर्चे पर महीनों से भारत के लिए चुनौती बनकर खड़ी चीन की सेना में पाकिस्तान के सैनिक भी शामिल हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया के बारे में सूचना आई है कि दोनों कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति भवन (White House) की ओर से इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि भी की गई है। उनके निजी चिकित्सक डॉक्टर सीन कॉनली की ओर से बताया गया है कि फिलहाल दोनों में कोरोना के शुरुआती और हल्के लक्षण हैं। वे अगले कुछ दिनों तक राष्ट्रपति भवन में ही रहेंगे। उनके स्वास्थ्य पर नज़दीकी निगाह रखी जा रही है।
आज एक अक्टूबर से काफ़ी-कुछ बदल गया है। इन बदलावों से हमें ‘सरोकार’ रखना चाहिए। इनके बारे में जानना चाहिए। क्योंकि ये एक जागरुक नागरिक के तौर पर हमारे लिए जरूरी हैं। हमारी दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े हुए हैं। इन पर एक नजर डालते हैं.....
लता मंगेशकर की ज़िन्दगी का शायद ही कोई पहलू ऐसा होगा, जिसे छुआ न गया हो। जिसके बारे में लिखा या पढ़ा न गया हो। फिर भी आज जब वे जीवन के 92वें पड़ाव पर पहुँची हैं, तो उनकी उम्र के बीते 91 साल के सफर के कुछ अहम मुकामों पर फिर नजर डाली जा सकती है। क्योंकि यह कोई सामान्य सफर नहीं है। हेमा से लता और फिर ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर, संघर्ष, साधना और सादगी के सफर का नाम है। जिससे हम कभी भी, कितनी बार भी रू-ब-रू हों, हमें प्रेरणा ही मिलती है। ये बताता है कि ‘भारत रत्न’ कोई यूँ ही नहीं हो जाता।
समाजसेवी डॉक्टर भरत और नन्दिता पाठक की बड़ी बेटी अपूर्वा की परवरिश इस तरह की हुई है कि वे सामाजिक सरोकारों से अपने आप को दूर नहीं रख पातीं। उनका बचपन ‘भारत रत्न’ नानाजी देशमुख के सान्निध्य में बीता है। उन्होंने छुटपन से ही अपने पिता-माता को भी समाज की सेवा में जीवन खपाते हुए देखा है। देख रही हैं। इसीलिए उनकी यह प्रकृति और प्रवृत्ति स्वाभाविक ही है। इसी प्रवृत्ति और प्रकृति की प्रेरणा है कि रविवार, 27 सितम्बर को जब दुनिया ने पश्चिमी संस्कृति वाला ‘डॉटर्स डे’ (Daughters' Day) मनाया तो अपूर्वा के मनोभाव देश की बेटियों, बेटी से माँ बनती और माँ से दादी-नानी बनती महिलाओं के लिए फूट पड़े
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थापित ध्रुपद संस्थान पिछले 15-20 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है। वैसे देश और दुनिया में यह संस्थान चर्चित तो पहले से भी रहा है। लेकिन पहले और अब में फर्क है। पहले यह सकारात्मक संगीतिक कारणों चर्चा में रहता था और अभी नकारात्मक व्यक्तिगत कारणों से है। बल्कि मौज़ूदा कारणों को व्यक्तिगत कहना भी ठीक नहीं होगा। वे व्यक्तिगत तो तब तक थे, जब तक संस्थान के गलियारों की कानाफूसी में समाए हुए थे। लेकिन अब तो सार्वजनिक मंचों पर सबके सामने हैं। बहस का केन्द्र बने हुए हैं और उसके जरिए हमें बता रहे हैं कि ध्रुपद संस्थान में जो रहा है, उसके लिए कहीं न कहीं ह
अभी 14 सितम्बर को पूरे देश में ‘हिन्दी दिवस’ मनाया गया। कहने के लिए तो यह ‘दिवस’ अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने और उसका प्रसार बढ़ाने और उसके प्रति अधिक जागरुकता लाने जैसे उद्देश्यों के साथ मनाया जाता है। लेकिन असल में हुआ क्या?
आज देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए संयुक्त परीक्षा (नीट-2020) आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में लगभग 15 लाख विद्यार्थी बैठ रहे हैं। इसके एक दिन पहले ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) यानि आईआईटी-जेईई (मेन्स) का नतीजा आया है। इसमें 24 परीक्षार्थियों की
हिन्दी फिल्मों के अभिनेता आमिर खान और उर्दू शायर मुनव्वर राणा इन दिनों विवादों में बने हुए हैं। अभी तीन-चार दिन पहले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुखपत्र ‘पाँचजन्य’ में एक लेख प्रकाशित हुआ है। इसका शीर्षक था, ‘ड्रैगन का प्यारा खान’। इसमें सवाल उठाया गया है कि चीन में आमिर खान की फ़िल्में क्यों शानदार कारोबार करती हैं?
पूरा देश इन दिनों गणपति बप्पा की आराधना में जुटा है। उनसे कामना कर रहा है, विनती कर रहा है कि वे अपने ‘विघ्नहर्ता’ स्वरूप के प्रभाव से देश और दुनिया को कोरोना महामारी के संकट से मुक्ति दिलाएँ। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामय:’ का सभी जीव-जनों आशीष दें। ऐसी कामनाओं, विनतियों के बीच ही अगर हमारी परिष्कृत भाषा ‘संस्कृत’ में भगवान गणेश की स्तुति, वह भी बढ़िया और सधे हुए उच्चारण के साथ सुनने मिल जाए तो क्या कहने। उससे होने वाली सुखद अनुभूति को शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। पर इस अनुभूति से गुजरना सम्भव हो पाया है।