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देश जब आज़ाद हुआ, तब कितने प्रतिशत आबादी अशिक्षित थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 22/10/2021

कर्ज़न के सुधारों से पहले विश्वविद्यालयों की प्रबंध समितियों (सीनेट) में अधिकांश निजी और आधिकारिक रसूख वाले लोग होते थे। ये समिति भारी-भरकम भी थीं। जैसे- कलकत्ता में विश्वविद्यालयों की प्रबंध समिति में 180 सदस्य थे। वहीं बंबई की समिति में 310 सदस्य। इन समितियों के सदस्यों का अकादमिक स्तर भी संदिग्ध था। बंबई में विश्वविद्यालय के कई अध्येता (फैलो) अपने नाम के दस्तख़त करना तक नहीं जानते थे। सबसे गंभीर शिकायत ये थी कि विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थान नहीं हैं। वहाँ संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी सिर्फ़ परीक्षा देने बैठते थे। इन विद्यार्थियों का भी स्तर कैसा था, इसका एक उदाहरण

लॉर्ड कर्जन को कुछ भारतीयों ने ‘उच्च शिक्षा के सर्वनाश का लेखक’ क्यों कहा?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/10/2021

वायसराय लॉर्ड कर्ज़न (1899-1905) ने सितंबर 1901 में शिमला सम्मेलन आयोजित किया। इसमें भारत की शिक्षा-व्यवस्था पर विचार हुआ। हालाँकि सरकारी अफसरों, शिक्षा अधिकारियों के अलावा किसी भारतीय ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वायसराय ने इसकी अध्यक्षता करते हुए लंबा भाषण दिया। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी नीतियों का ब्यौरा दिया। कुछ नीतियों की आलोचना भी की। यह भी उल्लेख किया कि तकनीकी विद्यालय स्थापित करने की योजना लागू नहीं की जा सकी क्योंकि भारतीय समाज के मध्य और उच्च वर्गों में उत्साह नहीं दिखा। हालाँकि सरकार को भी डर रहा कि तकनीकी शिक्षा से बेरोजगारी बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, जो तकन

आईसीएस में पहली बार कितने भारतीयों का चयन हुआ था और कब?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/10/2021

सर जॉर्ज कैंपबेल 1874 में बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। उन्होंने वहाँ की शिक्षा नीति पर एक रपट तैयार की। इसमें लिखा, “ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की मदद से विद्यालयों की स्थापना के लिए आम जन और ग्राम समितियों को आमंत्रित किया जाता है। योजना गाँवों को ऐसे शिक्षक उपलब्ध कराने जुड़ी है, जो विद्यालयों को कार्यकुशलता से स्थानीय शैली के मुताबिक चला सकें। इस काम के लिए उन्हें मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता बहुत कम है। महीने में दो, तीन या चार रुपए ही।…पर ये भी तय है कि यह छोटी सी सरकारी आर्थिक सहायता बहुत दूर तक जाएगी। नई योजना का संतोषजनक पहलू ये है कि इसे हिंदु, मुसलिम दोनों

वायसराय जॉन लॉरेंस को ‘हमारा सबसे बड़ा शत्रु’ किस अंग्रेज ने कहा था?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/10/2021

भारत के लोगों के स्वास्थ्य के प्रति सरकार का रुख़ ब्रिटेन से प्रेरित था। दरअसल अंग्रेज फौजियों की मृत्यु दर तब बहुत ज़्यादा थी। इसके मद्देनज़र फ्लोरेंस नाइटिंगेल (ब्रिटेन की समाज सुधारक और आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक) ने ब्रिटिश सरकार को मज़बूर किया कि वह सैन्य ठिकानों में साफ-सफाई की जाँच कराए। इसी क्रम में भारत में भी जाँच का फैसला किया गया। लिहाज़ा मई 1859 में ब्रिटेन सरकार ने एक आयोग बनाया। लेकिन इस आयोग ने लंदन में बैठे-बैठे ही सतही रायशुमारी के आधार पर रिपोर्ट दी। ब्रिटेन सरकार ने नाइटिंगेल से इस पर विशेषज्ञ राय माँगी। उन्होंने राय दी भी लेकिन सरकार ने रिपोर्ट प्रकाशित नह

मुक्ति का सबसे आसान रास्ता बुद्ध कौन सा बताते हैं?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 19/10/2021

प्राचीन काल में काशी राज्य पर ब्रह्मदत्त नाम के राजा राज्य करते थे। कहते हैं, उन्हीं के समय में एक पहाड़ी पर बोधिसत्त्व (बुद्ध) ने वृक्ष के रूप में पुनर्जन्म लिया। वे आसपास के क्षेत्रों में रहने वालों के आचार-विचार पर ध्यान रखते थे। उसी पहाड़ी के पास घाटी में एक गुरुकुल था। एक विद्वान पंडित वहाँ के आचार्य थे। वे अपने कुछ शिष्यों के साथ गुरुकुल में रहते थे। एक बार अनजाने में आचार्य से कोई पाप हो गया। उस पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने एक व्रत रखने का निश्चय किया। उस व्रत के नियम के अनुसार उन्हें एक बकरे की बलि देनी थी। इसलिए आचार्य ने किसी धनी व्यक्ति से एक बकरा माँगा। ब

कारखानों में काम करने की न्यूनतम उम्र अंग्रेजों ने पहली बार कितनी तय की थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 18/10/2021

ब्रिटिश भारत में 1858 से पहले कई बार अकाल, भुखमरी, महामारी आदि की स्थितियाँ बनीं। उनसे बड़े बेतरतीब तरीके से निपटा गया था। साल 1866-67 तक ये हाल रहा। उसी साल पूर्वी भारत में भयंकर अकाल पड़ा। ओडिशा में व्यापक असर हुआ। इसकी गंभीरता को देर से पहचाना गया। स्थिति अनियंत्रित हो गई। बारिश शुरू होने से तमाम रास्ते बंद हो गए। इससे ओडिशा के लिए ज़रूरी चीजों की आपूर्ति ठप हो गई। नतीज़ा ये हुआ कि करीब एक तिहाई आबादी भूखमरी, महामारी से जान गँवा बैठी। सरकार ने बारिश के बाद प्रभावित इलाकों में खाद्यान्न पहुँचाया लेकिन तब तक देर हाे चुकी थी। पहले की तरह इसकी भी जाँच हुई। जाँच रिपोर्ट देखने क

प्लास्टिक उत्पादों से भारतीयों का परिचय बड़े पैमाने पर कब हुआ?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 17/10/2021

औद्योगिक विस्तार में सरकार की भूमिका 1914 से पहले महज निजी पूँजी और उद्यमों को प्रोत्साहन देने तक सीमित थी। वह भी ख़ास यूरोपीय कारोबारियों के लिए। सरकार ने 1905 में वाणिज्य विभाग स्थापित किया था। मग़र इसके प्रभाव बाद में नजर। इसके बाद पहला औद्योगिक आयोग 1916 में बना, जिसकी रपट सालभर बाद आई। इसमें कहा गया कि भारत “अब भी बने-बनाए उत्पादों के बजाय मुख्य रूप से कच्चे माल का उत्पादक ही है।” इस बीच, प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत को हथियार उत्पादन के अलावा अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर सरकार का ध्यान गया। इस बारे में 1921 के राजकोषीय आयोग ने भी अनुशंस

भारत में औद्योगिक विस्तार का अगुवा किस भारतीय को माना जाता है?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 17/10/2021

भारत में उद्योगों का विस्तार मुख्य रूप से पूँजी के अधिग्रहण और रेलवे के फैलाव पर निर्भर रहा। यहाँ रेलवे की आधारशिला 1858 से पहले ही रख दी गई थी। सन् 1869 तक पूरे देश में 4,000 मील लंबे रेल पथ पर रेलें चलने लगी थीं। यह सब कुछ निजी पूँजी के बलबूते हुआ। हालाँकि सरकार ने रेल परियोजनाओं में पैसा लगाने वालों को गारंटी दी थी कि उन्हें पाँच फीसदी ब्याज की दर से मुनाफ़ा वापस मिलेगा। यह भरोसा देने का मकसद ये था कि ज़्यादा से ज़्यादा निवेश आकर्षित किया जा सके। सरकार ने अपनी गारंटी के बदले रेल संचालन और उस पर व्यय आदि का नियंत्रण अपने हाथ में रखा। रेलों से डाक और सेना की आवाजाही की सुवि

क्या हम जानते हैं, भारत में सहकारिता का प्रयोग कब से शुरू हुआ?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 15/10/2021

ब्रिटिश शासन ने भारतीय किसानों को कुछ परेशानियों से मुक्त किया तो कुछ नई उसके सामने खड़ी कर दीं। इसने आंतरिक अव्यवस्था को खत्म किया। लगान के तौर पर ज़बरदस्ती ज़्यादा पैसे ऐंठने के चलन को भी रोका। इन बुराईयों ने किसानों की उपज को ख़तरे में डाल दिया था। अंग्रेजी शासन ने किसानों को मौका दिया कि वे अपने अतिरिक्त उपज भंडार का ठीक से निस्तारण कर सकें। नगदी फसलें उगा सकें। जमीन पर पट्‌टेदारों के अधिकारों को मान्यता देने का भी लाभ हुआ। लेकिन कुछ अन्य घटनाक्रमों का ग्रामीण आबादी पर विपरीत प्रभाव भी पड़ा। जैसे…

विजयादशमी, 24 राग...एक विजया-स्तुति!

टीम डायरी, 15/10/2021

विजया दशमी पर शक्ति की आराधना का इससे बेहतर तरीका शायद ही कोई दूसरा हो सकता है। इस वीडियो में दिख रहीं गायिका सावनी शेंडे हैं। वरिष्ठ और आला दर्ज़े की दक्ष भारतीय शास्त्रीय गायिका। उन्होंने माँ दुर्गा की आराधना का ये नायाब नमूना अपने यू-ट्यूब चैनल पर पेश किया है। #अपनीडिजिटलडायरी ने संगीत, साहित्य, कला, संस्कृति के प्रति अपने ‘सरोकार’ की वजह से साभार इसे अपने पन्नों पर दर्ज़ किया है

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