चहेते पन्ने

भगवान महावीर मानव के अधोपतन का कारण क्या बताते हैं?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 28/12/2021

भगवान महावीर के शिष्य ने एक बार प्रश्न किया, “गुरुदेव, मनुष्य के अधोपतन का क्या कारण है और उससे अपनी मुक्ति के लिए क्या किया जाना चाहिए?” 

इसका उत्तर देने के बजाय महावीर ने प्रश्न किया, “यदि कोई कमंडलु भारी है और उसमें पानी भी अधिक मात्रा में समा सकता हो, तो क्या वह खाली अवस्था में छोड़े जाने पर डूबेगा?”

“कदापि नहीं,” शिष्य ने उन्हें ज़वाब दिया, “बस, उसमें कोई छिद्र न हो।” 

जो शक्तिशाली हैं, संभवतः उनका यही चरित्र है…दोहरा!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 27/12/2021

अशोक वर्णवाल (मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अफसर) ने लिखा…

मोती सिंह के सामने विकल्प था कि वे किसे चुनें- 'मैं नहीं तो कोई और' या 'मैं नहीं भले कोई और।' उन्होंने पहला और आसान लगने वाला विकल्प चुना। कोई और उस काम को करने के लिए राजी हो सकता था तो वे क्यों नहीं। 

भोपाल गैस त्रासदी घृणित विश्वासघात की कहानी है

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 24/12/2021

कलपेश (याग्निक) जी की टिप्पणी है…

मुट्ठी भर मठाधीश, पांच लाख निर्दोषों को छल रहे हैं। पूरे 26 बरस से। तब ये बेगुनाह निर्ममता से बर्बाद कर दिए गए। अब निर्लज्जता से प्रताड़ित किए जा रहे हैं। कानून के नाम पर। किंतु अन्याय की सीमा होती है। न्याय करने वाले हर व्यवस्था में होते ही हैं। दुखद यह है कि उन्हें झकझोरना पड़ता है। भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालती आदेश के बाद ऐसा करने का समय आ गया है। 

वे निशाने पर आने लगे, वे दामन बचाने लगे!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 23/12/2021

हादसे के जिम्मेदारों को लेकर अब तक यहां-वहां मंडराते रहे कई अहम सवाल सतह पर आकर देश भर गरमागरम बहस का विषय बन चुके थे। जैसे अचानक ज्वालामुखी फटा और लावा बाहर बह निकला। जो जवाबदेह थे और जीवित थे, वे निशाने पर आ गए। लेकिन हर कोई बच रहा था और दूसरों पर जिम्मेदारी डाल रहा था। जो दिवंगत थे, वे भी सुर्खियों में समाने लगे।… 

एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली ले जाने का आदेश अर्जुन सिंह के निवास से मिला था

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 21/12/2021

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह से उस व्यक्ति का नाम बताने का आग्रह किया है, जिसने उन्हें एंडरसन को तत्काल रिहाई की व्यवस्था करने को कहा था। इस बाबत उन्होंने श्री सिंह को एक पत्र लिखा है। इसमें मुख्यमंत्री ने लिखा कि पिछले 72 घंटों (फैसला आने के बाद) से देश इंतजार कर रहा है कि आप इस मामले में सच्चाई उजागर करें मप्र और खासतौर से भोपाल की जनता को यह अधिकार है कि वह अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री से हकीकत जान सके। चौहान साहब, ऐसे मासूम मत बनो। आप भी जानते हो कि ऐसी चिट्ठियों को कितनी संजीदगी से लिया जाता है। यह मानना पड़ेगा कि आपका यह वक्तव्य जरूर

अपनी लड़ाई की हार जीत हमें ही स्वर्ण अक्षरों में लिखनी है

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से 18/12/2021

आसमान में एक लम्बी सफ़ेद धुएँ की लकीर रह गई है। मानो कोई बहुत तेजी से गुजरा हो अपने पीछे पूरा ग़ुबार छोड़कर। इस सबके साथ सफ़ेद बादलों का झुंड, घर लौटते पक्षियों के समूह जिनका रंग साफ़ नज़र नहीं आता। ऊँचे टॉवर, उनसे ऊँचे पेड़ और क्षितिज की तलाश में सूरज का पीछा करते जाना और अन्त में जहाँ से मैं देख रहा हूँ, डूब जाना। क्या यही हश्र रह गया है जीवन का? 

केंद्र के साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/12/2021

…केंद्र में सरकार तब राजीव गांधी की थी। लाल साहब के इस खुलासे (केंद्र सरकार की ओर से साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए।) पर केंद्र की मौजूदा सरकार (फैसले के वक्त भी कांग्रेस की ही थी) अपनी खाल नहीं बचाएगी तो और क्या करेगी? तो तत्काल प्रभाव से वीरप्पा मोइली (तत्कालीन कानून मंत्री) ने लाल को ही लपेट दिया। मोइली ने कहा कि एंडरसन अगर पकड़ से बाहर हैं तो उसके लिए सीबीआई के तत्कालीन जांच अधिकारी बीआर लाल ही जिम्मेदार हैं। उन्हीं की वजह से आज एंडरसन के प्रत्यर्पण में दिक्कतें आ रही हैं। 

कानून मंत्री भूल गए...इंसाफ दफन करने के इंतजाम उन्हीं की पार्टी ने किए थे!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 16/12/2021

…केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली को अब पता चला है कि इंसाफ दफन हो गया है। उनका यही कथन आज (आठ जून 2010) की पहली सुर्खी है। यह उनका दिल्ली में दिया गया बयान है। अदालत के फैसले पर जब कैमरे सामने और माइक मुंह पर लगे तो मंत्री महोदय ने यह फरमाया। वे उस अतीत को भूल गए, जब इंसाफ को दफन करने के लिए ताबूत, रस्सी, कीलों और कब्र की खुदाई के लिए गैंती-फावड़े उन्हीं की पार्टी के सत्ताधारी नुमाइंदों ने तैयार कराए थे। अफसरों को उन्होंने रोजगार गारंटी योजना के जॉब कार्डधारी मजदूरों की तरह इस काम में लगा दिया था। किसी के जॉब कार्ड पर लिखा था कलेक्टर, किसी के कार्ड पर एसपी… 

भगवान महावीर ने अपने उपदेशों में जिन तीन रत्नों की चर्चा की, वे कौन से हैं?

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 14/12/2021

पृथ्वी पर तीन रत्न हैं। पहला- जल, दूसरा- अन्न और तीसरा- अच्छे बोल (पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्)। हम अक्सर जो भी बेहतर होता है, उसके प्रति उदासीन ही रहते हैं। क्योंकि हम एकदम आकर्षित करने वाली चीजों के प्रति आसक्त रहते हैं। यह एक सामान्य स्वभाव है और इसको बदलना कठिन है। इसीलिए कठिन चीजों को अपनाना तप हो जाता है। तप सामान्य सी दिखने वाली चीजें अपनाना भी है। इसलिए भगवान महावीर ने अपने उपदेशों में तीन रत्नों की चर्चा की है। जो जैन मत के मुख्य आधार हैं। पहला- सम्यक् दर्शन, दूसरा- सम्यक् ज्ञान और तीसरा- सम्यक् चरित्र। इनमें  सम्

एंडरसन को जब फैसले की जानकारी मिली होगी तो उसकी प्रतिक्रिया कैसी रही होगी?

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 8/12/2021

इस पहले से तय फैसले और 25 साल पहले हुए हादसे में नया यह भी था कि इस बार तमाम टीवी चैनल भी मीडिया के फलक पर वजूद में थे। रोजाना सुबह से करिस्माती और सनसनीखेज सुख के शिकार में भटकने वाले टीवी पत्रकारों के लिए अदालत के सामने नाराज लोगों की भीड़ और एक ऐसे मामले का फैसला एक बड़ी खबर थी, जिसमें 15 हजार से ज्यादा लोग मौत के मुंह में चले गए थे, हजारों हमेशा के लिए बीमार बेकार हो गए थे। ये सब उस गैस के शिकार थे, जो यूनियन कार्बाइड के प्लांट से दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात लीक हुई थी। तब टीवी चैनल नहीं थे। सिर्फ दूरदर्शन था। वह भी आज के खबरी चैनलों की तरह चौबीस घंटे खबरों से भरा नहीं रहता था

पृष्ठ

चहेते पन्ने की  सदस्यता लें!