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सब भूलना है, क्योंकि भूले बिना मन मुक्त होगा नहीं

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 19/2/2022

भूलना है बहुत कुछ। मसलन- वे रास्ते जो अब भी ख़्वाबों में भटकते हुए आ जाते हैं। वे बेज़ुबान आँखें जो रास्ता खोज रही थीं। सम्भवतः मंज़िलें भी। पर मैं आसमान से हट ही नहीं रहा था, ज़मीन पर खड़े होकर। मेरे कान उस टिटहरी की ओर लगे थे, जहाँ से अब उसके लौटने की उम्मीद नहीं थी। उन सूनी दुपहरियों को भूलना चाहता हूँ, जहाँ तेज गर्मी में पीपल और बरगद के नीचे गाँव के गाँव खाली पड़े थे महीनों से। और जो लोग चैत काटने गए थे लौटे नहीं थे। कुछ बुज़ुर्गों ने फिर भी मुझसे गुफ़्तगू की थी। एक बच्चे ने हैंडपम्प से खींचकर पानी पिलाया था। उस मिठास और ठंडेपन को भूलना चाहता हूँ। 

सरकारें हादसे की बदबूदार बिछात पर गंदी गोटियां ही चलती नज़र आ रही हैं!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/2/2022

भोपाल में भाजपा ने धरना-प्रदर्शन के जरिए मामले को और गरमाने की कोशिश की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज काली साड़ी पहनकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा है कि गैस पीड़ितों को न्याय और राहत दिलाने के लिए भाजपा लोकसभा सत्र के पहले दिन सदन में केस फिर खुलवाने के लिए प्रस्ताव पेश करेगी। साथ ही नियम 184 के तहत 1989 के समझौते को रद्द कर नए समझौता की मांग करेगी। इसमें पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा और दोषियों को सजा दिलाने की बात शामिल होगी। नियम 184 में पेश प्रस्ताव पर वोटिंग होती है। ऐसे में यदि कांग्रेस इसके खिलाफ वोटिंग करेगी तो उसकी कलई खुल जाएगी। उन

हम भारतीयों को कम है स्मार्टफोन की लत, ये कम ही रहे तो अच्छा

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 14/02/2022

आज के बुलेटिन में खासः 

प्रेम जीवन है, जीवन की अपनी गति है, मदमस्त लय है

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 9/2/2022

पटरियों ने हमेशा समानान्तर रहकर मूक साथ निभाया। पहाड़ों ने धरती और आकाश के बीच रहकर जोड़ने का काम किया। नदियाँ अपने उद्गम से निकलीं तो समुद्र में मिल जाने तक कल-कल करती रहीं। उसका रोना किसी ने नहीं देखा। अनथक चलती रहीं, जोड़तीं रहीं। जो मिला, उसे अपने में समा लिया और कभी उफ्फ़ नहीं किया किसी से।

2030 में रिटायर होगा अंतरिक्ष का अगुआ आईएसएस

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 08-02-2022

आज के बुलेटिन में ख़ासः 

लता मंगेशकर के बारे में वह सब, जिसकी बात थोड़ी कम हुई

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 07/02/2022

आज के अख़बारों में लता मंगेशकर को स्वरांजलि से बढ़कर दूसरा कुछ नहीं रहा। इसलिए आज डायरी का यह ख़ास बुलेटिन भी दीदी को समर्पित। 

इसमें जानिए वो बातें, जिनकी बात अख़बारों ने थोड़ी कम की। जैसे-

मौत तुझसे वादा है.... एक दिन मिलूँगा जल्द ही

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 5/2/2022

मौत की ख़बरें अब विचलित नही करतीं। रोज़ किसी न किसी के गुजर जाने की सूचना मिलती है। और ये सूचनाएँ एक आँकड़े में बदलकर दफ़न होती जा रही हैं। इन पर बोलना, सोचना और कुछ करना बेमानी लगता है। दुखद, नमन , श्रद्धांजलि या ओम शांति जैसे शब्द लिखना इतना मशीनी हो गया कि अंग्रेजी साहित्य के कवि टीएस इलियट की कविता ‘द वेस्ट लैंड’याद आती है और सब कुछ धुआँ-धुआँ होने लगता है। 

एंडरसन सात दिसंबर को क्या भोपाल के लोगों की मदद के लिए आया था?

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 3/2/2022

सात दिसंबर की हकीकत क्या है, यह सामने आना ही चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि एंडरसन वाकई चेरिटी के मकसद से यहां आया था। वह लोकसभा चुनावों के प्रचार का दौर था। हवाई जहाज की पायलटी छोड़कर राजीव गांधी देश को चलाने के लिए आगे आए ही थे। इंदिरा गांधी की मौत के बाद वे राजनीति की सवारी करने पर मजबूर हुए थे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पहली बार आम चुनाव के मैदान में थी। उनके राजनीतिक करियर की ये उनकी शुरूआती जनसभाएं थीं। जिस दिन एंडरसन भोपाल आया, राजीव गांधी हरदा में थे। अर्जुनसिंह भी वहीं थे। चुनावी सभा में राजीव गांधी के कहने पर अर्जुनसिंह ने एंडरसन साहब की जानकारी ली और उन्हें पत

बजट 'विद्या' : डिजिटल इंडिया के डिजिटल बजट की 5 अहम बातें

देवांशी वशिष्‍ठ, दिल्ली से, 02/02/2022

आज के बुलेटिन में ख़ासः 

महावीर स्वामी के बजट में मानव और ब्रह्मचर्य

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 1/2/2022

आज देश का बजट सदन के पटल पर प्रस्तुत किया गया। बजट को हम प्राय: आर्थिक सन्दर्भों में ही देखते हैं। जबकि उसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग सभी कुछ समाहित होता है। हाँ, यह अवश्य है कि अर्थ को केन्द्र में रखकर और अर्थ की सहायता से अन्य चीजों को पाने की प्रस्तावना है। आधुनिक युग में हम सभी संपन्न होना चाहते हैं। इसी कारण अर्थ केन्द्र में है। इसीलिए सम्पन्नता को हम प्राय: आर्थिक सन्दर्भों में देखते और समझते हैं। 

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