देखी-सुनी

ज्ञान की गोली..आज बात नए साल के ऐसे संकल्पों’ की, जो पूरे हो सकते हैं

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 1/1/2022

#अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों को #नॉलेजपिल्स में देवांशी आज बता रही हैं, नए साल के ऐसे संकल्पों की जो पूरे हो सकते हैं। जैसे- महीने में कम से कम एक किताब पढ़ना, डायरी लिखना, अपने अपनों को ख्याल रखना, उनके साथ अधिक से अधिक वक्त बिताना। ताकि हमारी जिंदगी में कुछ मिठास, थोड़ी खुशी घुल सके। 

ऐसे ही कुछ और.. जानते हैं देवांशी से। 

ज्ञान की गोली.. आज बात उनकी जो 2021 में सुर्खियों में रहे

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 31/12/2021

#अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों को #नॉलेजपिल्स में देवांशी आज बता रहीं हैं उनके बारे में, जो इस साल सुर्खियों में रहे। सुर्खियाँ बने। जैसे- भारतीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, जिन्होंने ओलंपिक में पहली बार भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) जैसी प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। सुंदर पिचई, कमला हैरिस जैसे भारतवंशी भी इस सूची में हैं। जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से भारत को कई बार गर्व करने का अवसर दिया।  

ऐसे ही कुछ लोगों के बारे में, जानते हैं देवांशी से।

ज्ञान की गोली.. आज बात साल 2021 के कुछ नवाचारों की

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 30/12/2021

#अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों को ‘नॉलेज पिल्स’ में देवांशी बता रहीं इस साल के कुछ चर्चित नवाचारों के बारे में। जैसे- एलजी का ओएलईडी टीवी। यह पलँग के पैरहाने पर फिट हो जाता है। यानि हम बिस्तर पर लेटे-लेटे आराम फरमाते हुए टीवी पर पसन्दीदा कार्यक्रम देख सकते हैं। ज़रूरत पड़े तो इसी टीवी को कंप्यूटर जैसा इस्तेमाल कर अपने काम निपटा सकते हैं। और जब नींद आए तो टीवी को पैरहाने में ही धीरे से नीचे सरकाकर खुद भी लम्बी तानकर सो सकते हैं। 

ऐसे ही और भी कुछ नवाचाारों की बात, जानते हैं देवांशी से।

ज्ञान की गोली.. छोटी सी

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 29/12/2021

#अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों के लिए ‘नॉलेज पिल्स’ में देवांशी बता रहीं इस साल की प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं के बारे में। ख़ास तौर पर वे जो जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग आदि के कारण सामनें आईं। जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यहाँ तक कि भारत के उत्तराखंड में भी जंगलों में लगी भयानक आग। बाढ़, भूकंप, तूफान और इसी तरह की अन्य घटनाएँ भी तमाम हुई हैं। इन घटनाओं से बड़े पैमाने पर जन के साथ धन की भी हानि हुई है। इस नुकसान से जरिए इन घटनाओं ने हमें बताया है कि हम आज नहीं चेते तो आने वाला कल हमारे लिए ही बड़ा मुश्किल होने वाला है। 

एक प्रयास ‘छोटा सा’... ज्ञान की गोली का!

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 28/12/2021

छोटी सी बच्ची का बड़ा सा काम। ‘नॉलेज पिल्स’ यानि ज्ञान की गोली के रूप में। दिल्ली से देवांशी वशिष्ठ ने यह कोशिश शुरू की है। #अपनीडिजिटलडायरी के पाठकों को ‘नॉलेज पिल्स’ देने। इसमें सामान्य ज्ञान की कुछ चुनिन्दा घटनाओं की जानकारी वे दे रही हैं। भाषा अंग्रेजी है उनकी। क्योंकि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अंग्रेजी माध्यम वाली है। हालाँकि यह अंग्रेजी ऐसी नहीं जो समझी न जा सके। देवांशी की कोशिश होगी कि वे रोज इस तरह की नॉलेज पिल्स डायरी के पाठकों को दे सकें। फिर भी वे अभी छोटी हैं तो सम्भव है, कभी सिलसिला चूके भी। हालाँकि डायरी के पाठकों का स्नेह उन्हें भरपूर मिला तो उनका प्रोत्साहन बढ़ेगा और

विजयादशमी, 24 राग...एक विजया-स्तुति!

टीम डायरी, 15/10/2021

विजया दशमी पर शक्ति की आराधना का इससे बेहतर तरीका शायद ही कोई दूसरा हो सकता है। इस वीडियो में दिख रहीं गायिका सावनी शेंडे हैं। वरिष्ठ और आला दर्ज़े की दक्ष भारतीय शास्त्रीय गायिका। उन्होंने माँ दुर्गा की आराधना का ये नायाब नमूना अपने यू-ट्यूब चैनल पर पेश किया है। #अपनीडिजिटलडायरी ने संगीत, साहित्य, कला, संस्कृति के प्रति अपने ‘सरोकार’ की वजह से साभार इसे अपने पन्नों पर दर्ज़ किया है

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार)

मन का हो...ये हमेशा क्यों नहीं अच्छा?

रैना द्विवेदी, भोपाल, मध्य प्रदेश से, 26/7/2021

हिन्दी फिल्मों के बड़े अभिनेता अमिताभ बच्चन अक्सर अपने जीवन का एक किस्सा सुनाया करते हैं। वे बताते हैं, “मैं छोटा ही था, जब बाबूजी ने जब मुझे जीवन के एक विचलित मोड़ पर ये सीख दी थी- मन का हो तो अच्छा, न हो तो ज्यादा अच्छा। उस वक्त मेरी समझ में नहीं आया कि जो मन का न हो वो ज्यादा अच्छा कैसे हो सकता है? लेकिन बाद में जब उन्होंने समझाया तो समझ गया कि अगर तुम्हारे मन का नहीं हो रहा है, तो समझो ईश्वर के मन का हो रहा है। और ईश्वर हमेशा तुम्हारा अच्छा ही चाहेंगे, इसलिए ज्यादा अच्छा।” 

तस्वीर (साभार)

गुरु पूर्णिमा पर स्वरांजलि की ‘पियाली’

टीम डायरी, 24/7/2021

भारत की समृद्ध गुरु-शिष्य परम्परा अगर कहीं अब भी अपने श्रेष्ठ स्वरूप (कुछ अगर-मगर छोड़ दें, तो बहुतायत) में है तो वह या तो आध्यात्म का क्षेत्र है या संगीत का। इसमें संगीत की बात करें तो सालों-साल की साधना से अपनी विधा में जो शिष्य थोड़े पक जाते हैं, वे अक्सर अपनी तैयारी के प्रदर्शन से गुरु/गुरुओं को स्वरांजलि, आदरांजलि दिया करते हैं।

मैं उन्हीं लाखों लाशों की तरफ़ से आप से माफ़ी माँगता हूँ

टीम डायरी, 22/7/2021

बीते दो-तीन दिनों राज्यसभा के सदस्य प्रोफेसर मनोज झा का सदन में दिया यह भाषण ख़बरिया ( Media) और सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर चल रहा है। चल क्या रहा है, छाया हुआ है। लोग उनके भाषण की तारीफ़ कर रहे हैं। तारीफ़ के काबिल है भी। क्योंकि आजकल के नेताओं से ऐसी उम्मीद कम ही की जाती है कि वे आम नागरिकों की ज़िन्दगी और मौत से जुड़े मुद्दों पर इतनी नज़दीकी संवेदनशीलता से बोलेंगे।

ओ मानसून के मन, सुन...

देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली से, 14/7/2021

प्रिय मानसून, 

कहाँ हो तुम? तुम्हें मालूम भी है, कब से यहाँ सब तुम्हारी राह देख रहे हैं? अब और देर मत करो आ जाओ। मैंने अख़बारों में तो पढ़ा था कि तुम इस बार जल्दी आ रहे हो। जून तक आ जाओगे। लेकिन यहाँ तो जुलाई भी एक-एक दिन बीतता जा रहा है और तुम्हारी कोई खोज ख़बर ही नहीं।

कल मैंने एक छोटी-सी गुहार लगाई तो तुम एक फुहार देकर लौट गए। फिर ढाक के वही तीन पात। 

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