मीडिया और सोशल मीडिया के बीच के स्वरूप वाला एक साझा मंच। यह हम सबका, हम सबके लिए और हम सबके द्वारा संचालित है। यहाँ हम अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। अपने अहसास बयाँ कर सकते हैं। अपने हुनर को सबके सामने रख सकते हैं। निजी से लेकर देश-दुनिया से जुड़े विभिन्न मसलों पर अपने ख़ासकर ऐसे विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं, जाे हमारी तरह औरों के लिए भी मायने रखते हों। कोई सीख देते हों। ऐसी तमाम सामग्री के साझाकरण के लिए हमारी शैली डायरी वाली होगी। जबकि अन्दाज़ डिजिटल यानि लिखने के साथ सुनने (ऑडियो) देखने (विज़ुअल) वाला भी।
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इस सबके लिए ‘डायरी’ ही क्यों?
मीडिया और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर यह सब पहले से हो रहा है। फिर भी हमारे बीच का एक बड़ा तबका उस घुड़दौड़ में अपने-आप को फिट नहीं पाता। कारण स्पष्ट है। मीडिया पर उसके ‘मालिकों’ की लगाम है। वहाँ उनकी मंशा, उनके हितों के अनुसार मुद्दों, विचारों, अभिव्यक्तियों को तोड़ा, मरोड़ा और भटकाया जाता है। किसी एक पक्ष में राय बनाने के लिए। आम आदमी के लिए तो वहाँ ज्यादा जगह ही नहीं दिखती। वहीं दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया ‘बेलगाम’ है। वहाँ सूचनाओं, प्रतिक्रियाओं के प्रवाह पर न रोक-टोक है और न उनकी प्रामाणिकता की गारंटी। इससे अच्छा पढ़ने, लिखने में रुचि रखने और कुछ सार्थक करने की मंशा रखने वाले लोग वहाँ भी अपने लिए ज़्यादा गुंजाइश नहीं देख पाते। निजी ब्लॉग वग़ैरह हैं लेकिन उनका दायरा भी मीडिया सा सोशल मीडिया के मंचों जितना विस्तृत नहीं है। इस तरह बीच में एक खालीपन-सा महसूस होता है। ‘डायरी’ इसे भरने का प्रयास है।
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‘डायरी’ कैसे अलग साबित होगी?
यहाँ ‘डायरी’ पर आने वाली सभी तरह की सामग्री (चाहे वह लिखी हुई हो या देखी, सुनी) पहले भाषा, शैली, प्रामाणिकता आदि की कसौटी पर परखी जाएगी। उसके बाद उसे प्रकाशित किया जाएगा। ‘डायरी’ किसी विचार या विचारधारा के प्रचार, प्रसार का जरिया नहीं होगी। बल्कि आम अदमी के अनुभव, अहसास, विचार, हुनर आदि के प्रचार-प्रसार में सहायक बनेगी। देश-दुनिया में, समाज में, व्यक्तिगत स्तर पर जो कई तरह की सकारात्मक पहल की जा रही हैं, उन्हें सामने लाने की कोशिश करेगी। एक जरिया बनेगी। मीडिया और सोशल मीडिया में भी जो, जिस स्तर पर अच्छा हो रहा है, उसे अधिक से अधिक प्रचारित, प्रसारित करने में सहयोगी बनेगी। उसे अपनी तरफ से प्रष्ठांकित (एन्डोर्स) करेगी। अपने ‘समर्थन’ का धक्का देगी। इसीलिए ‘डायरी’ की टीम सार्थकता, सकारात्मकता की मंशा वाले हर मन-मानस से अपेक्षा करती है कि इस प्रयास में सहभागी हों। इसे ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए साथ आएँ।
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‘डायरी’ से किस तरह के लोग जुड़ सकते हैं?
जिस तरह ‘डायरी’ लिखने के लिए भाषा या सामग्री के स्वरूप का कोई झंझट नहीं है। उसी तरह लिखने वालों के लिए उम्र आदि की भी किसी तरह की बन्दिश नहीं है। हर उम्र, हर वर्ग के लोग ‘डायरी’ लिख सकते हैं। ऑडियो-वीडियो सामग्री प्रकाशन के लिए भेज सकते हैं। सार्थकता, सकारात्मकता, सन्तोष की मंशा वाला सभी जन, हर मन-मानस इसमें अपना योगदान दे सकता है।
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‘डायरी’ और उससे जुड़ने वालों का भविष्य?
अपनी तरह से ‘डायरी’ एक अलग प्रयास है। अलहदा सी पहल। इस पहल से इत्तिफाक़ रखने वाले सभी लोग सहभागी, साझीदार या एक परिवार की तरह इससे जुड़ते चलेंगे। चूँकि ‘डायरी’ अभी कोई लाभ का उपक्रम नहीं है, इसलिए त्वरित रूप से हम सब एक सार्थक प्रयास में सहभागी-साझीदार होने का सन्तोष ही हासिल कर सकेंगे। हालाँकि भविष्य में ‘डायरी’ अगर किन्हीं मुकामों को छूती है तो उन सभी में भी हम सब बराबर से सहभागी बनेंगे, फिलहाल इस प्रयास को शुरू करने वालों की तरफ़ से इतना ही भरोसा दिया जा सकता है।