सरोकार

भारतीय पुरातत्व का संस्थापक किस अंग्रेज अफ़सर को कहा जाता है?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 25/8/2021

संख्या भले कम थी, लेकिन अंग्रेजों में कई लोग मानते थे कि भारत के बारे में अधिक जानना चाहिए। जैसे- सर विलियम जोन्स। उन्होंने 18वीं सदी के अंत में संस्कृत साहित्य की समृद्धता के बारे में जानकारियां दीं। उन्होंने ही 1785 में ‘द एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल’ की स्थापना की, जो आगे भारत से जुड़ी अंग्रेजों की जिज्ञासाओं की पूर्ति का केंद्र बन गई। सोसायटी ने ‘एशियाटिक रिसर्चर्स’ के नाम से एक अख़बार भी निकाला। इसके पहले ही संस्करण में बम्बई के नज़दीक एलीफेंटा की गुफाओं से जुड़े प्रसंग शामिल क

हर हिन्दुस्तानी भ्रष्ट है, ये कौन मानता था?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 24/8/2021

भारत में शुरू के 50 साल तक अंग्रेज आश्वस्त ही नहीं थे कि यहाँ उनका शासन लंबा भी हो सकता है। वे ख़ुद को असुरक्षित महसूस करते थे। इतने कि आलोचना करते समय भी सावधान रहते कि कहीं उनकी भावनाएँ किसी को आहत न कर दें। बेवज़ह उनके शासन के लिए नई मुसीबत न आन पड़े। उनमें तब भारतीय संस्कृति के प्रति थोड़ा सम्मान भी था। शायद इसीलिए कई अंग्रेज अफ़सर फारसी पढ़ने-बोलने लगे थे। वह उस समय शासन और साहित्य की भाषा थी। एक स्तर तक वे अपने को भारत के कुलीन वर्ग का हिस्सा समझने लगे थे। लेक

किस डर ने अंग्रेजों को अफ़ग़ानिस्तान में आत्मघाती युद्ध के लिए मज़बूर किया?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 23/8/2021

लॉर्ड हेस्टिंग्स भले साम्राज्य विस्तार के समर्थक रहे, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में काफ़ी सुधार भी किए। उनके कार्यकाल में कई उल्लेखनीय प्रशासक सामने आए। जैसे- मोंस्टुअर्ट एल्फिंस्टन (दक्षिण), कर्नल टॉड (राजपुताना) और थॉमस मुनरो (मद्रास)। ये लोग हिंदुस्तान की वास्तविकताओं, यहाँ की भौगोलिक, प्रशासनिक आवश्यकताओं से अच्छी तरह परिचित थे। लिहाज़ा उन्होंने इन्हीं के मुताबिक अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संज़ीदगी से स्वीकारा और उनका निर्वहन किया।

अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को किसकी मदद से मारा?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 22/8/2021

अब तक दक्षिण में मैसूर के सुल्तान हैदर अली की फ्रांसीसियों से दोस्ती हो चुकी थी। वे अंग्रेजों के ख़िलाफ़ संघर्ष में उसकी सहायता कर रहे थे। इससे उत्साहित हैदर अली ने 1780 में लगभग 90,000 सैनिकों और 100 से ज़्यादा तोपों के साथ मद्रास पर धावा बोल दिया। उसके सैनिकों ने फोर्ट सेंट जॉर्ज  को हर तरफ़ से घेर लिया। ऐसे में मद्रास की प्रशासक परिषद ने वॉरेन हेस्टिंग्स से मदद माँगी। हेस्टिंग्स ने तुरंत सर आयर कूट के नेतृत्व में काफ़ी धन और बड़ा सैन्य बल मद्रास भेजा। आयर कूट छापामार युद्ध के विशेषज्ञ थे। उन्होंने पोर्टो नोवो की लड़ाई में हैदर अली को हरा दिया। इस पराजय के एक साल बाद 1782

सही मायने में हिन्दुस्तान में ब्रिटिश हुक़ूमत की नींव कब पड़ी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 21/8/2021

मीर क़ासिम अंग्रेजों की कठपुतली बनने को तैयार नहीं हुआ। उसने कंपनी की व्यापारिक गतिविधियों में दख़लंदाज़ी शुरू कर दी। इसके कारण थे। मसलन- मुग़ल बादशाह के पुराने फ़रमान की आड़ लेकर अंग्रेज करमुक्त व्यापार को अपना अधिकार समझने लगे थे। जबकि उस फ़रमान में अंग्रेजों को सिर्फ़ बंदरग़ाहों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों में करों से छूट दी गई थी। हिंदुस्तान की ज़मीन पर नहीं। लेकिन अंग्रेज उस फ़रमान का दुरुपयोग कर मोटा मुनाफ़ा कमा रहे थे। इससे राजकोष को नुकसान हो रहा था। मीर क़ासिम ने जब यह देखा तो उसने सभी व्यापारिक गतिविधियाँ करमुक्त कर दीं।

जेलों में ख़ास यातना-गृहों को ‘काल-कोठरी’ नाम किसने दिया?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 20/8/2021

उस समय लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर थे सर जोसिया चाइल्ड। उनका मानना था कि भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव रखना कंपनी का कर्त्तव्य है। इसलिए उन्होंने 80,000 पाउंड अदा कर इंग्लैंड के राजा चार्ल्स-द्वितीय से निषेधाज्ञा जारी कराई। इसके जरिए ईस्ट इंडिया कंपनी की प्रतिस्पर्धी ब्रिटिश कंपनियों को भारत में व्यावसायिक गतिविधियाँ चलाने से रोक दिया गया। हालाँकि 1694 में ब्रिटिश संसद ने संकल्प पारित कर यह निषेधाज्ञा रद्द कर दी। इसी बीच 1697 में स्पाइटलफील्ड्स (लंदन का एक इलाका) के र

शिवाजी ने अंग्रेजों से समझौता क्यूँ किया था?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 19/8/2021

अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के कारोबारी जब पहली समुद्री यात्रा पर निकले तो भारत नहीं, सुमात्रा पहुँचे थे। लेकिन 1608 में कंपनी के एजेंटों- बैंटम और मॉल्यूकस ने प्रबंधन को बताया कि भारत के कच्चे सूत की ग्राहकों में काफ़ी माँग है। लिहाज़ा भारत में कंपनी का वाणिज्यिक केंद्र होना चाहिए। इससे भारत के कच्चे सूत की ख़रीद-फ़रोख़्त आसान होगी। इसके बाद कंपनी की आग्रह पर तत्कालीन मुग़ल बादशाह शाह जहाँ ने उसे हिंदुस्तान में वाणिज्यिक केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी। हालाँकि पुर्तगालियों ने इसका विरोध किया क्योंकि वे भारत में पहले से थे। वे भारत पहुँचने वाले पहले यूरोपीय थे। लेकिन उनका विरोध बेअ

अवध का इलाका काफ़ी समय तक अंग्रेजों के कब्ज़े से बाहर क्यों रहा?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 18/8/2021

19वीं सदी की शुरुआत में मध्य और उत्तर भारत मराठा राजाओं के नियंत्रण में था। ये सब पेशवा के लिए निष्ठावान कहे जाते थे। पर नाममात्र के लिए। इनके प्रशासन का स्वरूप कुछ ऐसा था कि प्रभावी तरीके से राजकोष में राजस्व आता रहे, बस। राजकोष के लिए राजस्व इकट्‌ठा करने के तीन मुख्य तरीके थे। पहला- सीधे जनता से कर वसूली। दूसरा- युद्धों में लूटी गई दौलत। तीसरा- पराजित राजाओं से उनकी सुरक्षा के बदले मिलने वाला धन। लेकिन ये तरीके ज़्यदा सफल नहीं हुए। धीरे-धीरे बड़े इलाके मराठाओं के प्रभ

हिन्दुस्तान पर अंग्रेजों के आधिपत्य की शुरुआत किन हालात में हुई?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 17/8/2021

सन् 1748 से 1762 के बीच उत्तर-पश्चिमी भारत पर कई बार अफ़ग़ानों के हमले हुए। जबकि मध्य और उत्तरी भारत पर मराठों का कब्ज़ा हो गया। उन्हें मुग़लों का उत्तराधिकारी समझा जाने लगा। हालाँकि मराठों ने भी हिंदु होने के बावज़ूद मंदिरों को तोड़ा और गायों तथा पुजारियों तक को मौत के घाट उतारा। वे जहाँ भी गए अपने पीछे तबाही के निशान छोड़ गए। इस समय हिंदुस्तान में कोई मज़बूत केंद्रीय सत्ता नहीं थी। इससे हिंदुस्तान के तटवर्ती क्षेत्रों में शिविर स्थापित कर चुके यूरोप के छोटे कारोबारियों पर भी इसका विपरीत असर पड़ा। हिंदुस्तान की केंद्रीय सत्ता ने अब तक उनकी सुरक्षा का ज़िम्मा अपने कंधों पर ले

औरंगज़ेब को क्यों लगता था कि अकबर ने मुग़ल सल्तनत का नुकसान किया?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 16/8/2021

अकबर के समय तक हर स्तर पर हिंदु जीवन पद्धति और तौर-तरीकों को स्वीकार करने की मंशा दिखती थी। यही कारण था कि अकबर ने प्रशासन में हिंदुओं को बराबरी से सहभागी बनाया। कई हिंदु अधिकारियों को बड़े पदों पर नियुक्त किया। फिर चाहे वह सैन्य प्रशासन हो या नागरिक। हिंदुओं के प्रभाव में उसने गौहत्या पर प्रतिबंध लगाया। इस अपराध के लिए मौत की सज़ा तक का प्रावधान किया। मगर अकबर के बाद हालात तेजी से बदले। मसलन, 1632 में शाह जहाँ ने एक आदेश जारी कर नए हिंदु मंदिरों के निर्माण पर रोक लगा दी। साथ ही निर्माणाधीन मंदिरों को गिराने का फ

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