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अपरिग्रह : जो मिले, सब ईश्वर को समर्पित कर दो

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 8/2/2022

भगवान महावीर के पांच महाव्रतों में अंतिम महाव्रत है अपरिग्रह। बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है और साथ ही कठिन। सम्भवत: इसी बात को ध्यान में रखकर सबसे अन्त में इसका उल्लेख किया है। सत्य बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन करना किसी वस्तु का त्याग कर देना आसान है, अपरिग्रह के मुकाबले। तो चलिए! पहले अपरिग्रह को समझ लेते हैं कि ये है क्या?

राग इश्क़ः हर वीराने में सदियों से है प्रेम का अनहद नाद

संदीप नाईक, देवास, मध्य प्रदेश से, 07/02/2022

पचमढ़ी में किसी भी जगह जाओ- चाहे छोटे झरनों से झरते पानी को छूने के लिए बी-फॉल में नीचे उतरो, छुपने के लिए पांडव गुफ़ा जाओ, धूपगढ़ का सूर्योदय देखो या सूर्यास्त, दर्शन के लिए गुप्त महादेव जाओ या सिर्फ़ यूँ ही यायावरी करते हुए पहाड़ों में घूमते रहो, आपको उस वीराने में कोई न कोई गाने वाला मिल ही जाएगा। एक बूढ़ी औरत को बहुदा मैंने वहाँ देखा है। वह अकेले में अपनी धुन में गाती रहती है। पता नहीं कौन मीरा दीवानी है।   

मौत तुझसे वादा है.... एक दिन मिलूँगा जल्द ही

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 5/2/2022

मौत की ख़बरें अब विचलित नही करतीं। रोज़ किसी न किसी के गुजर जाने की सूचना मिलती है। और ये सूचनाएँ एक आँकड़े में बदलकर दफ़न होती जा रही हैं। इन पर बोलना, सोचना और कुछ करना बेमानी लगता है। दुखद, नमन , श्रद्धांजलि या ओम शांति जैसे शब्द लिखना इतना मशीनी हो गया कि अंग्रेजी साहित्य के कवि टीएस इलियट की कविता ‘द वेस्ट लैंड’याद आती है और सब कुछ धुआँ-धुआँ होने लगता है। 

महावीर स्वामी के बजट में मानव और ब्रह्मचर्य

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 1/2/2022

आज देश का बजट सदन के पटल पर प्रस्तुत किया गया। बजट को हम प्राय: आर्थिक सन्दर्भों में ही देखते हैं। जबकि उसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग सभी कुछ समाहित होता है। हाँ, यह अवश्य है कि अर्थ को केन्द्र में रखकर और अर्थ की सहायता से अन्य चीजों को पाने की प्रस्तावना है। आधुनिक युग में हम सभी संपन्न होना चाहते हैं। इसी कारण अर्थ केन्द्र में है। इसीलिए सम्पन्नता को हम प्राय: आर्थिक सन्दर्भों में देखते और समझते हैं। 

‘अड़सठ तीरथ इस घट भीतर’

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 29/1/2022

वहाँ इतना अँधेरा था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। इतना कि न नीचे ज़मीन दिख रही थी और न आसमान ऊपर। जब गर्दन घुमाई टेढ़ी करके, एक मौन हर तरफ व्याप्त था। दूर कहीं उजाला था तो कुछ चिंगारियाँ फुनगीनुमा थीं जो उस राख में से फुदक कर उछल पड़ती थीं। यह सब उस भीड़ से बहुत दूर था, जिसके पास हमेशा इस राख और इन चिंगारियों का भय व्याप्त रहता था। इस कटु सत्य को जानते सब थे, मानना कोई नहीं चाहता था। 

सौ हाथों से कमाओ और हजार हाथों से बाँट दो

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 25/1/2022

धन कमाने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति प्रायः अपने पक्ष में यह कहता है कि ‘सर्वे गुणाः काञ्चनम् आश्रयन्ति’ यानि सभी गुण धन के आश्रय से ही फलते-फूलते हैं। इसीलिए हर कोई करोड़पति बनना चाहता है। लेकिन कैसे बनना है? यह प्रश्न दिमाग में आते ही उत्तर भी आता है, कैसे भी। यह ‘कैसे भी’ आश्चर्यजनक उत्तर है। क्योंकि इसमें मार्ग क्या हो, इसका महत्त्व नहीं रह जाता। रह जाता है, केवल धन कमाकर ‘धनपशु’ बन जाना। 

ठन, ठन, ठन, ठन, ठन - थक गया हूँ और शोर बढ़ रहा है

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 22/1/2022

आवाजों का शोर है। इधर जीवन में एक और आवाज़ जुड़ी है, ठन- ठन-ठन, चौबीसों घण्टे गूँज रही है। हर समय सोते-जागते, यह आवाज़ पीछा नही छोड़ रही, छाती को फाड़कर, गले को चीरकर निकल रही है।

सत्यव्रत कैसा हो? यह बताते हुए जैन आचार्य कहते हैं…

अनुज राज पाठक, दिल्ली से, 17/1/2022 

कक्षा छठवीं की संस्कृत की पाठ्यपुस्तक में एक श्लोक है, 

“सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः। सत्येन वाति वायुश्च, सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्।।”  

भावार्थ है कि सत्य के कारण पृथ्वी स्थिर है। सत्य के कारण सूर्य अपनी ऊष्मा प्रदान करता है। सत्य के कारण वायु बहती है। इस संसार में सब कुछ सत्य से ही प्रतिष्ठित है। 

वो आदमी थकता ही नहीं था...

संदीप नाइक, देवास, मध्य प्रदेश से, 17/1/2022

देवास का मल्हार स्मृति मन्दिर अनगिनत कलाकारों की प्रस्तुति का साक्षी रहा है। संगीत, वाद्य यंत्र, बैंड, नृत्य से लेकर तमाम कलाएँ यहाँ आकर धन्य हुईं और यहाँ के दर्शकों और श्रोताओं को तृप्ति दी।

यहीं छोटे से मंच पर संगतकारों के संग बिरजू महाराज को लगभग दो ढाई घण्टे थिरकते देखा है मैंने। शायद तीन बार से ज़्यादा और हर बार उनकी ऊर्जा चकित करती थी। उन्हें 1970 से देख रहा था। देवास, इन्दौर, भोपाल, मुम्बई, दिल्ली। वो आदमी थकता ही नहीं था। गाढ़ी लाली लगे होठों पर गज़ब की मुस्कान हमेशा चिपकी रहती थी। 

एक जेंटलमैन का पत्र, क्रिकेट के नाम

N इंडियन, दिल्ली से, 16/01/2022

Focus on your team as well and not just the opposition, always trying to catch people.

मैंने यह सुना तो इसके बैकग्राउंड में एक और आवाज़ सुनाई दी

Whole country playing against 11 boys... 

केपटाउन टेस्ट का लाइव प्रसारण देखते हुए जब मैंने यह दूसरा बयान सुना तो आवाज़ पहचान गया। और मुस्कुराकर रह गया। लेकिन फिर रीप्ले में देखा कि विराट कोहली स्टंप की ओर गए और झुककर पूरे होशो-हवास में कहा,

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