आज एक अक्टूबर से काफ़ी-कुछ बदल गया है। इन बदलावों से हमें ‘सरोकार’ रखना चाहिए। इनके बारे में जानना चाहिए। क्योंकि ये एक जागरुक नागरिक के तौर पर हमारे लिए जरूरी हैं। हमारी दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े हुए हैं। इन पर एक नजर डालते हैं.....
समाजसेवी डॉक्टर भरत और नन्दिता पाठक की बड़ी बेटी अपूर्वा की परवरिश इस तरह की हुई है कि वे सामाजिक सरोकारों से अपने आप को दूर नहीं रख पातीं। उनका बचपन ‘भारत रत्न’ नानाजी देशमुख के सान्निध्य में बीता है। उन्होंने छुटपन से ही अपने पिता-माता को भी समाज की सेवा में जीवन खपाते हुए देखा है। देख रही हैं। इसीलिए उनकी यह प्रकृति और प्रवृत्ति स्वाभाविक ही है। इसी प्रवृत्ति और प्रकृति की प्रेरणा है कि रविवार, 27 सितम्बर को जब दुनिया ने पश्चिमी संस्कृति वाला ‘डॉटर्स डे’ (Daughters' Day) मनाया तो अपूर्वा के मनोभाव देश की बेटियों, बेटी से माँ बनती और माँ से दादी-नानी बनती महिलाओं के लिए फूट पड़े
अभी 14 सितम्बर को पूरे देश में ‘हिन्दी दिवस’ मनाया गया। कहने के लिए तो यह ‘दिवस’ अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने और उसका प्रसार बढ़ाने और उसके प्रति अधिक जागरुकता लाने जैसे उद्देश्यों के साथ मनाया जाता है। लेकिन असल में हुआ क्या?
आज देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए संयुक्त परीक्षा (नीट-2020) आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा में लगभग 15 लाख विद्यार्थी बैठ रहे हैं। इसके एक दिन पहले ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) यानि आईआईटी-जेईई (मेन्स) का नतीजा आया है। इसमें 24 परीक्षार्थियों की
अयोध्या में बुधवार पाँच अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर के निर्माण का शुभारम्भ हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिन में करीब साढ़े बारह बजे शुभ मुहूर्त में शिला पूजन कर निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया। लगभग पाँच सौ साल के लम्बे संघर्ष के बाद देश आज इस ऐतिहासिक घटना का साक्षी बना है। संघर्ष के दौर में पीढ़ियाँ खप गईं।
कुछ दिनों पहले एक ख़बर पढ़ी थी। विशेष तौर पर मध्य प्रदेश के सन्दर्भ में थी। हालाँकि कमोबेश वैसी स्थिति दूसरे राज्यों में भी हो सकती हैं। सम्भवत: होगी ही। उस ख़बर में बताया गया था कि निजी स्कूलों के असरदार संचालक सरकार में अपने सम्पर्कों के जरिए राज्य शिक्षा विभाग के आला अफ़सरों पर दबाव डाल रहे हैं। उनके द्वारा कोशिश ये की जा रही है कि किसी तरह स्कूलों को फिर खोलने की अनुमति मिल जाए। भले सप्ताह में तीन दिन ही सही। उनकी दलील है कि चूँकि कोरोना महामारी के संक्रमण की वज़ह से की गई देशव्यापी तालाबन्दी अब ख़त्म हो चुकी है। धीरे-धीरे सभी गतिविधियाँ खुल रही हैं। सामान्य हो र
भारत के लिए चीन की चुनौती ‘राष्ट्रीय सरोकार’ से जुड़ा मसला है। कैसे? यह हाल की दो ख़बरों से अन्दाज़ा लग सकता है। ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका की ख़बर के मुताबिक चीन ने भारत के लेह-लद्दाख से लगभग 250 किलोमीटर दूर ज़मीन के नीचे 14 सुरंगें बनाईं हैं। यहाँ उसने करीब दो दर्जन मिसाइलों को रखने का इन्तज़ाम किया है। यही नहीं तिब्बत में उसने लड़ाकू विमानों के लिए भी ऐसा ही अड्डा तैयार किया है।