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भारत रत्न नाना जी देशमुख जी से मेरा परिचय व संपर्क वर्ष 1992-93 में जय प्रभा ग्राम, गोण्डा में नाबार्ड की ओर से मेरी तैनाती के दौरान हुआ। उनकी समग्र ग्रामीण विकास की परिकल्पना में आर्थिक व सांकृतिक विकास, विकास के केन्द्र विंदु थे। इसी परिकल्पना को चित्रकूट में उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के रूप में क्रियान्वित भी किया। बुन्देलखण्ड संगीत जगत आदरणीय भारत रत्न नाना जी व स्वयं गोपाल भाई जी के योगदान को भुला नहीं सकता। इस शरदोत्सव की पुण्य तिथि पर परमादरणीय नाना जी का विनम्र स्मरण।

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