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मालूम है कि तेरा लिखा है। गजब है। कितने रूपों में जी लेता है। घर आ कर मिलता है तब। फेसबुक पेज पर अलग। वॉट्सएप्प और लेखों और कविताओं और कॉलेज में अलग। दिन में और रात में अलग। तेरे परिवार या पुरुष मित्र या महिला मित्र या संस्थाएं या जरूरतमंद सबके साथ न जाने कितने रूप। कभी-कभी पहचान न सके। लेकिन दोस्त ही क्या जो तेरे हर रूप को स्वीकार न करें। खुश रह।

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